रिश्तेदार के पड़ोसी से हुआ था झगड़ा
अनोखी सजा भुगत कर भी बालमुकुंद को मिल रहा सुकून
उरई। 25 साल पहले रिश्तेदार के पड़ोसी से हुए झगड़े के बाद दर्ज हुए मारपीट के मुकदमे में कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई। इस सजा ने जहां 25 साल से मुकदमे का तनाव भुगत रहे आरोपी को राहत दी वही एक नई मिसाल भी कायम की है। हालांकि मामूली विवाद का मुकदमा 25 साल तक चलने के कारण झगड़े के आरोपी को इतने लंबे समय तक अपराधी के रूप में तनाव झेलना पड़ा। मगर अंत भला तो सब भला सोचकर मारपीट का आरोपी बालमुकुंद राहत की सांस ले रहा है।
उरई के इकौना गांव निवासी बालमुकुंद 26 जनवरी 1996 को कानपुर देहात क्षेत्र स्थित नगवा गांव में अपने साढू के यहां गया था। वहां पर साडू के पड़ोस में रहने वाले फूल सिंह से उसका झगड़ा हो गया। फूल सिंह की तहरीर पर देवराहट थाने में बालमुकुंद के खिलाफ धारा 323, 504, 506 और 325 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। 2014 में बालमुकुंद और उसके साडू को भोगनीपुर की मुंसिफ कोर्ट ने चार-चार साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ बालमुकुंद ने अपर जिला सत्र न्यायाधीश कानपुर देहात की कोर्ट में दया याचिका दायर की। बालमुकुंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए एडीजे सप्तम प्रवीण कुमार पांडे ने 4 फरवरी 2021 को सुनाए गए फैसले में अनोखी सजा देकर मिसाल कायम की।
उन्होंने निचली अदालत द्वारा दी गयी सजा को माफ करने की एवज में बालमुकुंद से अपने गांव के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर 2 माह तक कम्युनिटी सेवा करने का आदेश दिया। कोर्ट का आदेश पाने के बाद से बालमुकुंद जालौन के कदौरा समुदायिक केंद्र स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी सेवाएं दे रहा है। बालमुकुंद इस अनोखी सजा के लिए कोर्ट का आभार प्रकट कर रहा है। उसका कहना है कि सीएससी में सेवा करने से उसे यह सजा नहीं मिलती लगती बल्कि यह सेवा कार्य करके उसे सुकून मिलता है। 25 साल तक बतौर अपराधी कोर्ट के चक्कर काटने वाला बालमुकुंद इस सजा को पाने के बाद भी बहुत खुश नजर आ रहा है और वह तन-मन से मरीजों की सेवा करने में जुटा हुआ है।

