Presidential Election 2022 India: शिक्षक से राष्ट्रपति पद तक सफर तय करने वाली द्रौपदी मुर्मू आखिर हैं कौन

पॉलिटिक्सPresidential Election 2022 India: शिक्षक से राष्ट्रपति पद तक सफर तय करने...

Date:

नई दिल्ली। बीजेपी की कद्दावर आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू एक बार फिर से चर्चा में हैं। आदिवासी की पुरोधा कहलाने  वाली कद्दावर महिला शख्सिय  द्रौपदी मूर्मू को झारखंड में सबसे अधिक समय तक राज्यपाल बने रहने का गौरव प्राप्त है। झारखंड की राज्यपाल होते हुए द्रौपदी मुर्मू ने छह साल से अधिक का अपना  कार्यकाल निर्विवाद रूप से काट दिया। द्रौपदी मुर्मू झारखंड की एकमात्र ऐसी राज्यपाल रहीं, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी द्रौपदी मुर्मू राज्‍यपाल पद पर रहीं। उनका कार्यकाल 17 मई 2021 को समाप्त हुआ था। द्रौपदी मुर्मू आदिवासियों, बालिकाओं के मुद्दों को लेकर हमेशा सजग रहीं। आदिवासियों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर वे कई बार सरकार को सीधे निर्देश देती थीं।

Read also:Opposition meet over joint candidate for presidential polls on June 21

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनी द्रौपदी मुर्मू का  विवादों से बेहद दूर रहीं।  कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने कार्यकाल में प्रदेश के विश्वविद्यालयों के लिए चांसलर पोर्टल शुरू करवाया। इसके माध्यम से झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों के कॉलेजों के सभी छात्रों का ऑनलाइन नामांकन शुरू कराया। विश्वविद्यालयों में यह नया और पहला प्रयास था, जिसका लाभ छात्रों को मिला। द्रौपदी मुर्मू ने राज्‍य सरकार के कई विधेयकों को लौटा कर अपने साहसिक निर्णय का भी परिचय दिया।  झारखंड में भाजपा की रघुवर दास सरकार में द्रौपदी ने सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक सहित कई विधेयकों को  वापस लौटाया। वहीं हेमंत सोरेन की सरकार में द्रौपदी मूर्मू ने जनजातीय परामर्शदात्रि समिति के गठन से संबंधित फाइल वापस कर दी थी। 

द्रौपदी मुर्मू का जन्म ओडिशा में  20 जून 1958 को हुआ। उनके पिता  बिरंची नारायण टुडू व पति का नाम श्याम चरम मुर्मू है। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा की संथाल परिवार से हैं। मयूरभंज के ब्लॉक कुसुमी के गाँव उपरबेड़ा में उनका बचपन बीता। 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत द्रौपदी मुर्मू ने की। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के राजरंगपुर जिले से पहली बार पार्षद बनी। इसके बाद भाजपा की ओडिशा ईकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष रहीं।

Read also:Is Mamata doomed to fail yet again as presidential poll kingmaker?

द्रौपदी मुर्मू राजनीति में आने से पहले शिक्षक थीं। उन्होंने श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक के पद पर कार्य किया। वे कुछ दिनों तक सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में भी कार्यरत रहीं। द्रौपदी मुर्मू  2002 से वर्ष 2009 तक ओडिशा के मयूरभंज जिले के बीजेपी जिलाध्यक्ष के रूप में  कार्य कर चुकी हैं।
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक बनीं। वो बीजू जनता दल और भाजपा गठबंधन में ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहीं थीं। द्रौपदी मुर्मू को विधान सभा ने सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया।  द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त कर चुकीं हैं। द्रौपदी मुर्मू  जीवन में पति और दो बेटों को खोने के बाद भी हर बाधा का डटकर मुकाबला करतीं रहीं। द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी उत्थान के लिए काम करने का 20 साल से अधिक समय  का अनुभव है। वे इस समय बीजेपी के लिए सबसे बड़ा महिला आदिवासी चेहरा मानी जाती हैं।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

ई-श्रम कार्ड डाउनलोड कैसे करें? पूरी प्रक्रिया समझें

अगर आपका ई-श्रम कार्ड बन चुका है, तो अगला...

ई-श्रम कार्ड का स्टेटस कैसे चेक करें? पूरी प्रक्रिया समझें

अगर आपने ई-श्रम कार्ड के लिए आवेदन कर दिया...

ई-श्रम कार्ड क्या है? पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

देश में करोड़ों लोग असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) में...