हिमाचल प्रदेश में भाजपा का शासन है और राज्य में यह चुनावी वर्ष है और राज्य विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीने पहले यहाँ धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा कानून पास किया गया है. हिमाचल प्रदेश में अब जबरन धर्मांतरण पर 10 साल तक सजा हो सकती है, पहले सात साल का प्रावधान था. वहीँ विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ऐसा करके भाजपा विधानसभा चुनावों को धार्मिक रंग देना चाहती है. जब जबरन धर्मान्तरण पर पहले से ही कानून है और लम्बी सजा का भी प्रावधान है तो फिर अब इस कानून की क्या ज़रुरत।
बता दें कि भाजपा शासित लगभग सभी राज्यों में जबरन धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनाये गए हैं. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में गुजरात के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं. द हिमाचल प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलिजन (एमेडमेंट) बिल, 2022 को विधानसभा में सर्वसम्मति और ध्वनिमत से पारित किया गया है. इस नए कानून के तहत अब जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है. इस बिल में सामूहिक धर्मांतरण को फिर से परिभाषित किया गया है. बिल में कहा गया है कि अगर कोई शख्स दो या उससे ज्यादा लोगों का धर्म एक समय में परिवर्तित करवाता है तो वो सामूहिक धर्मांतरण माना जायेगा और उसपर नए कानून के तहत मामला चलेगा.
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हिमाचल प्रदेश की जय राम ठाकुर सरकार ने यह कदम आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया है. जय राम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने शुक्रवार को बिल पेश किया. यह हिमाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 का अधिक कठोर संस्करण है, जो 18 महीने पहले लागू हुआ था. 2019 अधिनियम को राज्य विधानसभा में पारित होने के 15 महीने बाद 21 दिसंबर, 2020 को यह अधिनियम अधिसूचित किया गया था. इस नए बिल के पारित होने पर विपक्ष ने भी सरकार और भाजपा पर हमला बोला है. मुख्या विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अलावा राज्य में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा की धर्म की राजनीति बताया है.

