मेरठ। गोरखपुर मंडल (Gorakhpur Division) के जिलों की करीब 28 सीटों पर गोरक्ष पीठ का ही हुक्म चलता है। इन मंडल और स्वयं गोरखपुर जिले की सियासत गोरक्ष पीठ के इर्दगिर्द ही घूमती है। आम चुनाव से लेकर पंचायत स्तर के चुनाव में हर हुक्म गोरक्ष पीठ का ही माना जाता है। यहीं कारण है कि जनप्रतिनिधि पंचायत का हो या फिर लोकसभा का वहीं चुना जाता है। जिसे पीठ का आर्शिवाद प्राप्त होता है। गोरखपुर और मंडल की सियासत पर पिछले तीन दशकों से गोरक्ष पीठ का ही कब्जा है। यहां की सियासत को भेद पाना इतना आसान नहीं है। जितना कि विपक्षी दल समझ रहे हैं। इस बार पीठ के महंत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) स्वयं भी चुनावी मैदान में हैं। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके है।
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वहीं इस बार वो पहली बार विधानसभा चुनाव (Assembly elections) लड़ रहे हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर मंडल (गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर) की 28 सीटों में से 24 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस बार सपा और अन्य क्षेत्रीय दल भाजपा के इसी जीत के आंकड़े को घटाने की तैयारी कर रहे हैं। सपा यहां ब्राहमणों के साथ मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की तैयारी में हैं तो वहीं बसपा भी दलित एवं मुस्लिम वोटों के सहारे गोरखपुर फतह की कोशिश में है। इस इलाके में योगी की ताकत उनका अपना कार्य है। पिछले पांच साल में उन्होंनें गोरखपुर ही नहीं मंडल के अन्य जिलों में विकास कार्य कराए हैं। वहीं इस इलाके में गोरक्ष पीठ में आमजन की अगाध श्रद्धा और विश्वास है। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार में पूरी जिम्मेदारी निभाई है।

