लखीमपुर हिंसा में जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ता के घर जाने की मिली सजा
नई दिल्ली। किसान आंदोलन की शुरूआत से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे योगेन्द्र यादव को संयुक्त किसान मोर्चा से सस्पेंड कर दिया गया है। योगेन्द्र यादव की गलती यह है कि संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल होने के बावजूद उन्होंने लखीमपुर खीरी हिंसा में जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के घर जाने की हिमाकत की।
गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी हिंसा में किसानों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की भी जान गयी थी। योगेन्द्र यादव ने ऐसे ही एक भाजपा कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर जाकर उनके परिवार को सांत्वना दी थी। योगेन्द्र यादव ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर इस मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि शहीद किसान की श्रद्धाजंलि सभा से लौटते हुए हम हिंसा मेें जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर भी गये। उनके परिवार ने हमसे यह पूछा की हमारे बेटे का क्या कसूर था, क्या हम किसान नहीं हैं? आपके साथी ने क्रिया-प्रतिक्रिया वाली बात क्यों कही? योगेन्द्र यादव ने लिखा कि शुभम के परिवार के सवाल उनके कानों में गूंज रहे हैं।
ये मेरा किसान नहीं, ये मेरा भगवान नहीं…
इस बात पर संयुक्त किसान मोर्चा ने योगेंद्र यादव को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा था। बताया गया कि बैठक ने योगेन्द्र यादव ने भाजपा कार्यकर्ता के यहां जाने का कारण व्यक्तिगत बताते हुए किसानों की भावनाएं आहत होने पर माफी मांगी थी। योगेन्द्र यादव ने यह भी कहा कि वह संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से नहीं बल्कि मानवता के नाते मृत भाजपा कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गये थे।
लेकिन योगेन्द्र यादव की बात से संयुक्त किसान मोर्चा सहमत नहीं हुआ और उन्हें मोर्चा से एक महीने के लिये सस्पेंड कर दिया। इस मामले में योगेन्द्र यादव ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है मगर उनके निलंबन को लेकर मोर्चा में दरार पड़ने की संभावनाआंे से इंकार नहीं किया जा सकता।

