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World Bank: भारत में तकनीक शिक्षा सुधार के लिए विश्व बैंक देगा 20 अरब रुपए की सहायता

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World Bank: भारत में तकनीकी शिक्षा सुधार के लिए विश्व बैंक 20 अरब रुपए की सहायता देगा। इससे देश के करीब तीन लाख विद्यार्थियों को लाभ होगा। ये जानकारी देते हुए विश्व बैंक कंट्री निदेशक ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा, परियोजना की सहायता से अगले पांच साल के दौरान 275 सरकारी तकनीकी संस्थानों के साढ़े तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। भारत में तकनीकी शिक्षा का विस्तार हो रहा है।

विश्व बैंक ने भारत की तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में 20.94 अरब रुपए के कर्ज को मंजूरी दी है। योजना के तहत अगले पांच साल में सभी राज्यों से चुने गए 275 सरकारी तकनीकी संस्थानों के 3.50 लाख विद्यार्थियों को इसका मिलेगा। विश्व बैंक के मुताबिक परियोजना के जरिए तकनीक संस्थानों में शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के कौशल विकास और रोजगार परक बनाने में मदद मिलेगी। इससे उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के रूप में विद्यार्थियों की उन्नत पाठ्यक्रम, नई तकनीक और संचार में पहुंच बढ़ेगी।

साढ़े तीन विद्यार्थियों को होगा लाभ

विश्व बैंक के कंट्री निदेशक ऑगस्टे तानो कौमे ने बताया कि परियोजना की सहायता से अगले पांच सालों के दौरान 275 सरकारी तकनीकी संस्थानों के साढ़े तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। भारत में तकनीकी शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2011-12 में भारत के 40,000 कॉलेजों में 29 मिलियन विद्यार्थी पंजीकृत थे। वर्ष 2019-20 में 40,000 विश्वविद्यालयों में 39 मिलियन विद्यार्थी पंजीकृत हुए थे। भारतीय शिक्षा प्रणाली में तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षमताओं में बढ़त बनी है।

प्लेसमेंट में मिलेगा लाभ

शिक्षा के क्षेत्र में लगातार तेजी आ रही है। तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार के साथ बेहतर प्रशासन पर जोर है। परियोजना के तहत विद्यार्थियों को संचार और जलवायु में उभरती प्रौद्योगिकियों सहित उन्नत पाठ्यक्रम तक पहुंच मिलेगी। विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और प्लेसमेंट में लाभ मिलेगा। परियोजना भारत की नई शिक्षा नीति, 2020 के अंतगर्त लागू होगी। परियोजना नौकरियों और व्यावसायिक अवसरों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने का काम करेगी। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके अलावा महिला विद्यार्थियों से आग्रह किया जाएगा कि वह सलाहकारों और पूर्व विद्यार्थियों के साथ जुड़े। वर्तमान में स्नातक इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की संख्या कुल विद्यार्थियों के मुकाबले 30 प्रतिशत से कम है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति की महिला विद्यार्थियों की बहुत कम है।

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