देहरादून। उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार का विकास तो देखो, गर्भवती महिला को सड़क तक आने के लिए चलना पड़ा 6 घंटे. मामला टिहरी गढ़वाल के जौनपुर ब्लाक के एक गांव का है जंहा पर महिला को लेबर पेन होने के बाद 6 घंटो तक अँधेरे में पैदल चलना पड़ा. गनीमत यह रही की महिला ने इतनी जदोजहद के बाद हॉस्पिटल पहुँच बेटे को जन्म दिया. माँ और बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य बताये जा रहे है. लेकिन महिला के इस संघर्ष ने एक बार उत्तराखंड में विकास के दावो की पोल खोल दी है. मजे की बात तो यह है कि पी एम्जीएसवाई की कोर नेटवर्क में यह गांव सड़क से कनेक्ट दिखा रहा है लेकिन सड़क नहीं बनी.
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उत्तराखंड में आखिरी छोर के व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के डबल इंजन की सरकार के दावे की जमीनी हकीकत कुछ और ही है. जिसकी बानगी पेश कर रहा है हाल ही का टिहरी जिले के गोठ गांव का है. दरअसल 22 जून को गांव की अंजू नाम की महिला को प्रसव पीड़ा हुई पति की लाख कोशिशों के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं बनी तब पति सोमवारी लाल अपनी पत्नी को पैदल ही लेकर चल दिए. दर्द से कहराती अंजू घने जंगलो की पगडंडियों को टार्च की रौशनी के सहारे पार करती गई. करीब ढाई किलोमीटर का जंगल का सफर पार करने में अंजू को 6 घंटे लग गए. सुबह बजे अंजू सड़क पर पहुंची. जंहा से वह टेक्सी के माध्यम से मसूरी के अस्पताल पहुँची.
पहले भी आ चुके है ऐसे मामले
गर्भवती अंजू का उत्तराखंड में यह कोई पहला मामला नहीं है जब सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खुली हो. इससे पहले भी 2020 में जोशीमठ ब्लाक के पोखनी-डुमुक कलगोठ क्षेत्र में बीमार बुजुर्ग को पालकी में मीलो का सफर तय कर स्वास्थय केंद्र तक पहुँचाने की तस्वीरें सामने आई थी. कई बार इस तरह के मामले सामने आ चुके है जिसमे लोगों को स्वास्थय सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करते देखा गया.
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कनेक्ट तो है लेकिन सड़क नहीं
धनोल्टी लग्गा गोठ के प्रधान बताते है कि सड़क के लिए विधायक , डीएम सभी को चिट्ठी लिख चुके है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है. वे बताते है कि सात महीने पहले सर्वे जरूर किया गया था.लेकिन PMGSY के कोर नेटवर्क में इस गांव को सड़क से कनेक्ट दिखाया गया है यही वजह है की गांव के लिए सड़क का प्रस्ताव नहीं भेजा गया है.

