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सामाजिक दूरी युक्त- भीड़ मुक्त पंचायत चुनाव आसान नहीं


सामाजिक दूरी युक्त- भीड़ मुक्त पंचायत चुनाव आसान नहीं

मान लीजिए कोरोना काल काफी लम्बा खिचे और हमें हमामारी कानून की एहतियातों में अपनी ज़िन्दगी को ढालना पड़े। लम्बे दौर तक कोई भी काम नहीं रोका जा सकता इसलिए सबकुछ होगा लेकिन सब कामों के दायरे तय होंगे। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ही हर काम को अंजाम दिया जाएगा।

ऑनलाइन स्कूल, ऑनलाइन शॉपिंग और ऑनलाइन ऑफिस का काम… जिन्दगी की कुछ आवश्यकताओं को अंजाम देने के अलग-अलग रास्ते और विकल्प तय किए गए हैं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में कोरोना काल की एहतियातों संग पंचायत चुनाव के मॉडल का एक ख़ाका तैयार किया गया है। यदि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सेनीटाइज़र के साथ बिना भीड़-भाड़ के चुनाव कराने में यदि योगी सरकार सफल हो जाती है तो ये “कोरोना चुनाव मॉडल” देश के सामने एक मिसाल बनेगा। जिस तरह मोदी का गुजरात मॉडल चर्चा मे रहा वैसे ही यूपी का कोरोना चुनाव मॉडल अन्य चुनावों में भी अपनाया जाएगा। यूपी में ही सात-आठ महीने बाद विधानसभा चुनाव की हलचल़े तेज़ हो जानी हैं। आगे के दिनों तक कोरोना लम्बा खिंचा तो विधानसभा चुनाव भी पंचायत चुनाव की तर्ज पर होगा। यानी बिना भीड़-भाड़ वाली रैलियों/सभाओं के महामारी एक्ट/कोरोना प्रोटोकॉल और धारा 144 के साए वाला अद्भुत चुनाव।

जिस तरह यूपी के पंचायत चुनाव को विधानसभा का सेमीफाइनल कहा जा रहा है। ये भी कह सकते हैं कि महामारी के दौर में कोरोना प्रोटोकॉल के पालन के साथ कोई बड़ा चुनाव कैसे कराया जाए इसकी रिहर्सल के तौर पर पंचायत चुनाव में नये नियमों का कोलाज तैयार किया गया है।

हांलाकि करीब बारह करोड़ से अधिक लोगों की सहभागिता वाला पंचायत चुनाव का बड़ा दायरा है। किसी भी चुनाव का तसव्वुर करते ही नजरों के सामने भीड़ आ जाती है। लम्बी-लम्बी कतारें, शोर-शराबा और भीड़-भाड़ वाली रैलियां-जनसभाएं.. इन रंगों के बिना चुनाव की कल्पना ही करना मुश्किल है तो अंदाजा लगाइये कि भीड़ मुक्त और सामाजिक दूरी युक्त चुनाव कराना कितना मुश्किल है।

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