अमित बिश्नोई
ठंडी सरसराती हवा, फ़िज़ा में कोहरे की चादर, शाम के पांच बजे ही रात का एहसास, सड़कों पर सन्नाटा, ऐसे में आप का मन लॉन्ग ड्राइव का करे और आप अपनी कार लेकर शबनम से धुली हुई काली सड़कों पर निकल पड़ते हैं तो सही मायनों में आप सर्दी के खूबसूरत मौसम का मज़ा उठाते हैं। आम तौर पर भीड़ से भरी और चीख पुकार करती हुई सड़कें आपका स्वागत, अभिनन्दन करने को तैयार रहती हैं. बाहर वादियों जैसा नज़ारा और कार के अंदर बज रहा म्यूजिक एक रोमांटिक माहौल पैदा करता है. साथ में कोई है तो फिर क्या कहने और नहीं है तो क्या गम है. दरअसल ये इस मौसम की खूबसूरती है जो हर इंसान को अंदर तक खूबसूरत बना देती है. आप गौर करें तो आपको इसका एहसास होगा कि सर्दियों में आपके विचारों में भी एक नयापन आता है, नकारात्मकता किनारे होती है और आपका पॉजिटिव चीज़ों की तरफ ध्यान ज़्यादा आकर्षित होता है. यही वजह है कि आपका मन घूमने को करता है, दुनिया देखने को करता है, कुदरत के नज़ारों की तरफ नज़रे दौड़ाता है.
आप कहेंगे कि ये तो सर्दियों में हमेशा से होता है और उसका सबसे बड़ा कारण शायद छुट्टियां होती हैं, लेकिन ये पूरी तरह से सही नहीं है. ये इस मौसम का असर है जो आपके मन में छुट्टियों का मूड बनता है.

किसी ने कहा है
यादों की शाल ओढ़ के आवारा गर्दियाँ
काटी हैं हमने यूँ भी दिसंबर की सर्दियाँ
शायर ने सही कहा, दिसम्बर की सर्दियों को यादों का मौसम भी कहा जाता है क्योंकि रातें बड़ी लम्बी हो जाती हैं, तन्हाईयाँ और बड़ी हो जाती हैं जो इंसान को आवारा गर्दी को मजबूर कर देती हैं, अगर आपने गुलशन नंदा के उपन्यास पढ़े होंगे तो आपके ज़हन में ऐसे बहुत से किरदार बसे होंगे जो यादों की शाल ओढ़े कश्मीर की वादियों में घूमते अपने पुराने प्रेम की तलाश करते नज़र आएंगे, वो प्यार जो इन्ही सर्दियों में इन्हीं वादियों में कभी उनसे बिछड़ गया था.
बात सिर्फ दिसंबर तक सीमित नहीं हैं, जनवरी भी बड़ी बदमाश होती है , किसी ने क्या खूब कहा है
सर्द हैं थपेड़े हवा भी सुरसुरी है
मासूम था दिसंबर, बदमाश जनवरी है

जी हाँ 25 दिसंबर, क्रिसमस सेलेब्रेशन से शुरू हुई सर्दियों का असली रूप तो जनवरी में ही नज़र आता है. जब बिस्तर से निकलने का मन न करे तो उसे जनवरी का महीना कहते हैं. ये उन लोगों के लिए तो बहुत ख़ास होता है जो यादों की शाल ओढ़कर आवारागर्दी नहीं कर सकते। ये सर्दियों के मौसम का मज़ा बाहर से ज़्यादा घर में उठाते हैं। घर के अंदर का गर्म और आरामदायक माहौल, वहीँ बाहर तेज़ ठंड जिसका एहसास अंदर तक, गरमा गरम भोजन, अंगेठी में जलती आग का मज़ा, पकवानों की खुशबू से महकता घर. हवा में गर्माहट और प्यार है जिसका हर साल रहता इंतजार है। रज़ाइयों में ही दुबककर चाय की चुस्कियां, सर्दियों की शायद सबसे खूबसूरत चीज़ होती है।
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, तस्वीर के दो रुख होते हैं। सर्दियों का ये मौसम भी अपने में दो रुख समेटे रहता है, एक जो हमने ऊपर बयान किया और दूसरा जो अक्सर हिन्दुस्तान की फूटपाथ पर नज़र आता है। सर्दियों का मौसम इनके लिए किसी अज़ाब से कम नहीं होता। खुले आसमान के नीचे रहने वाले लाखों बेघर खूबसूरत सर्दियों की एक एक रात किस तरह गुज़ारते हैं, इसका दर्द सिर्फ यही लोग ही समझ सकते हैं. सर्दियों का मज़ा किस तरह का होता है इसका अनुभव इन्हें नहीं होता, खाने से ज़्यादा इन्हें अपने शरीर को ढकने की फ़िक्र रहती है, इस मौसम में अक्सर ये ऐसे स्थानों की खोज में रहते हैं जहाँ सर्द हवाओं के थपेड़े इनपर सीधे न पड़ रहे हों, इन्हें पूरी रात सरकारी अलाव के पास बिताते हुए देखा जा सकता है। आखिर में उन दो पंक्तियों से अपनी बात खत्म करता हूँ जो मेरी नहीं हैं

किस्मत को ख़राब बोलने वालों,
कभी किसी गरीब के पास बैठकर पूछना ज़िन्दगी क्या है?
इसलिए मेरी नज़र में सर्दियाँ सर्द भी होती हैं और ज़र्द भी, सिक्के के दो पहलू की तरह.

