कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

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कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

  • 48 घंटों में 800 से अधिक रजिस्ट्रेशन किए गए

कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए दो दिवसीय इंटरनेशनल वेबीनार की शुक्रवार को शुरुआत हुई. देश-विदेश से आए अपनी-अपनी फील्ड के दिग्गजों ने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी की ओर से हुए वेबीनार में अपने विचार रखें.वक्ताओं ने कहा कि कोविड-19 के साथ हमें जीना सीखना होगा. लॉकडाउन में जो हमनें सबक सीखे हैं उसे हमें अपने जीवन में उतारना होगा. टेक्नोलॉजी का उपयोग करके जल्द हम कोविड-19 को समाप्त कर देंगे लेकिन अभी कितना समय लगेगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. आगे कहा टेक्नोलॉजी ही एकमात्र सहारा है जिससे शिक्षा और शोध के कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है. गौरतलब है कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के भौतिक विज्ञान विभाग की ओर से वेबिनार का सफलतापूर्वक संचालन हुआ.15 मई यानी शुक्रवार से शुरू हुए इंटरनेशनल वेबीनार का उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्व विद्यालय की प्रति कुलपति प्रोफेसर वाई विमला ने की. उद्घाटन सत्र का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ. इसके बाद वेबीनार के संयोजक और भौतिक विज्ञान के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर वीरपाल सिंह ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया.

मुख्य अतिथि का भव्य स्वागत
प्रोफेसर वीरपाल ने विशेष रूप से कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर किशनलाल जोकि राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला एनसीएल नई दिल्ली के निदेशक रहे हैं और आजकल भारत सरकार की शोध को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं जैसे डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी आदि की विभिन्न समितियों के अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं का धन्यवाद दिया और उनका स्वागत सत्कार किया. प्रोफेसर वीरपाल ने जू मैप से जुड़े हुए अन्य प्रोफेसर और वैज्ञानिकों का भी स्वागत किया और वेबीनार से जुड़ने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया किया. वेबीनार में हिंदुस्तान के अतिरिक्त विश्व के अनेक देशों के विशेषज्ञों ने भी प्रति भाग लिया इसमें प्रमुख रूप से प्रोफेसर पीके गुप्ता, प्रोफेसर एसपी करें, प्रोफेसर पूनम टंडन, प्रोफेसर रमेश चंद्र, प्रोफेसर दीनो जारो सर जी यंत्र की स्कॉट लैंड, यूके प्रोफेसर गगन कुमार आदि रहे. सचिव प्रोफेसर अनिल कुमार मलिक ने वेबीनार के बारे में विस्तार से जानकारी दी उन्होंने बताया कि वेबीनार में कुल 8 सत्र होंगे आमंत्रित व्याख्यान के अतिरिक्त मौखिक और पोस्टर सत्र भी आयोजित किए जाएंगे.

स्ट्रक्चर जानना अत्यंत आवश्यक
प्रोफेसर मलिक ने बताया इतने कम समय के बावजूद सिर्फ सिर्फ 48 घंटों में 800 से अधिक रजिस्ट्रेशन किए गए. यह रजिस्ट्रेशन देश के विभिन्न अग्रणी संस्थानों जैसे आईआईटी एनआईटी हैदराबाद यूनिवर्सिटी लखनऊ यूनिवर्सिटी बीएचयू के प्रतिभागियों द्वारा किए गए. प्रोफेसर मलिक ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर किशन लाल का विस्तृत परिचय सभी प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर किशनलाल ने कॉमेडी 19 का जिक्र करते हुए वायरस को पहचानने और उस पर शोध करने की प्रक्रिया के क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि अनु को जानने के लिए उनका स्ट्रक्चर जानना अत्यंत आवश्यक है. शुरुआती दिनों में एक्स-रे डिक्शन तकनीक से पिक्चर जानने की शुरुआत 1912 से ब्रेक द्वारा की गई तत्पश्चात हाई फ्रिकवेंसी संपूर्ण परावर्तन का प्रयोग भी पदार्थों के अध्ययन में होने लगा. अब तक लगभग 1000000 स्ट्रक्चर को जाना जा चुका है. इसके लिए उन्होंने हाई क्वालिटी टेंपरेचर सेंसर जैसे उपकरणों पर बल दिया. उन्होंने कहा कि हमें करोना वायरस के साथ जीना सीखना पड़ेगा.अध्यक्षीय संबोधन से पहले प्रथम विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर एसपी खरे ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभाग के प्रोफेसर को वेबीनार की सफलता के लिए शुभकामना दी. कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति प्रोफेसर वाई विमला ने पहले मुख्य अतिथि प्रोफेसर किशनलाल को धन्यवाद दिया और वेबीनार के आयोजकों को वेबीनार की सफलता के लिए शुभकामना दी. अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने अंतर विषयक शोध की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और कहा कि समय आ गया है कि सब साथ आएं और मानवता के भले के लिए नए-नए आविष्कार करें. उद्घाटन सत्र के अंत में डॉ. योगेंद्र गौतम ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद दिया उद्घाटन सत्र के उपरांत तकनीकी सत्र में विशेष रूप से प्रोफेसर पीके गुप्ता प्रोफेसर दीनू प्रोफेसर आर एस वास प्रोफेसर चंद्र दिए टंडन और प्रोफेसर गगन कुमार ने अपने अपने शोध अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साझा किया. विशेष रुप से प्रोफेसर दावास ने सोलर रेडिएशन का दूरसंचार पर प्रभाव प्रोफेसर दीन औजारों जींस की प्लाज्मा और एक्सीलेटर प्रोफेसर अभिषेक अध्ययन के फायदे और प्रोफेसर पैराडाइज रेडिएशन पर अपने विचार प्रस्तुत किए.

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