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क्या यूपी में भी लगेगा INDIA गठबंधन को झटका

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अमित बिश्नोई

भारत जोड़ो न्याय यात्रा इस समय झारखण्ड में है और उसका यूपी में आगमन बस होने ही वाला है. राहुल की ये यात्रा इंडिया गठबंधन के लिए एक परीक्षा भी है। विशेषकर उत्तर प्रदेश में इस यात्रा की अहमियत और भी बढ़ जाती क्योंकि किसी भी पार्टी या गठबंधन को केंद्र की सत्ता तक पहुँचाने में यूपी सबसे महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाता है. लोकसभा की 80 सीटें जो यहाँ से आती हैं। इंडिया गठबंधन को बिहार और बंगाल में तो झटका लग ही चुका। उसके पास अब मुख्य राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश ही बचा है जहाँ इंडिया गठबंधन को समाजवादी पार्टी लीड करती है, ये बात अलग है कि INDIA को कांग्रेस नेतृत्व लीड करता हुआ ही दिखाई देता है क्योंकि बाकियों के रुख में कोई भी स्पष्टीकरण नहीं है, समाजवादी पार्टी भी बार बार किसी न किसी तरह अपने बयानों से इस तरह के सवाल उठाती है जिसपर गठबंधन के भविष्य पर उँगलियाँ उठने लगती हैं. उत्तर प्रदेश में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के पहुँचने से पहले अब अखिलेश यादव ने ये कहकर एक और विवाद पैदा करने की कोशिश की है कि उन्हें भारत जोड़ो न्याय यात्रा का न्योता नहीं मिला है.

अखिलेश ने ये बात सीधे और सरल तौर पर नहीं कही, उन्होंने बाकायदा इस मुद्दे पर कटाक्ष किया और कहा कि कुछ बड़े आयोजनों पर कुछ बड़ी पार्टियां समाजवादी पार्टी को बुलाती ही नहीं हैं और बिना बुलाये हम उन आयोजनों में कैसे जा सकते हैं। अखिलेश का ये ताज़ा बयान दर्शाता है कि कांग्रेस और सपा के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. हालाँकि अखिलेश के इस बयान के फ़ौरन बाद कांग्रेस की तरफ से स्पष्टीकरण भी आ गया कि यूपी के लिए भारत जोड़ो न्याय यात्रा का रुट फ़ाइनल हो रहा है और जैसे ही रुट मैप फ़ाइनल होता है, सपा प्रमुख को औपचारिक निमंत्रण भेजा जायगा। कांग्रेस की तरफ से ये भी कहा गया कि सपा और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है और सबकुछ ठीक है।

दरअसल कांग्रेस कहिये या इंडिया गठबंधन उसके हाथ से काफी कुछ फिसलता जा रहा है. बिहार में नितीश कुमार के पाला बदलने और बंगाल में ममता बनर्जी के सुर बदलने के बाद कांग्रेस पार्टी यूपी में अखिलेश को अपने हाथों से फिसलने नहीं देना चाहती, इसलिए उसके आक्रामक तेवरों में नरमी दिखाई देती है. वर्ना कांग्रेस नेताओं के तेवर यूपी में भाजपा से ज़्यादा सपा पर ही तीखे रहे हैं क्योंकि उन्हें मालूम है भाजपा की तुलना में सपा के वोट बैंक में सेंध लगाना ज़्यादा आसान है।

अखिलेश यादव का भी रवैय्या गठबंधन को लेकर सुबह और शाम के बीच कई बार बदलता दिखाई देता है. सुबह को उनका अगर बयान आता है कि इंडिया गंठबंधन के साथ मिलकर यूपी से भाजपा का सफाया करेंगे वहीँ शाम को वो कांग्रेस से शिकायत करते हुए नज़र आते हैं. कल बाराबंकी में उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की पूरी कोशिश रहेगी कि यूपी में गठबंधन हो और सफल रहे लेकिन साथ ही वो ये भी कहते हैं कि वो बिना गठबंधन के भी चुनाव लड़ने को तैयार हैं. अखिलेश ने यूपी में अपनी तरफ से गठबंधन का खाका भी फाइनल कर दिया। रालोद को कौन कौन सी सात सीटों पर गठबंधन के तहत चुनाव लड़ना, उसने स्पष्ट कर दिया, अपने लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी, कांग्रेस के लिए 11 सीटें भी आरक्षित कर दीं , बिना उससे कोई बात किये हुए और बिना सीटों का स्पष्टीकरण करते हुए कि ये सीटें कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ी हैं, सिर्फ एक नंबर जारी कर माले को उलझा दिया है.

बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी को अखिलेश का ये रवैया पसंद नहीं आ रहा है और नाराज़गी भी है लेकिन इंडिया गठबंधन की मजबूरी से मामला थमा हुआ है। अखिलेश को भी मालूम है कि नितीश और ममता के जाने के बाद उनकी अहमियत इंडिया गठबंधन के लिए कितनी अहम् है। कांग्रेस पार्टी के पास रियेक्ट करने का ज़्यादा मौका नहीं है, अखिलेश कांग्रेस नेतृत्व को ये भी जताना चाहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भले ही कांग्रेस बड़ी पार्टी है लेकिन यूपी में बड़े भाई की भूमिका में सपा ही है इसलिए कांग्रेस को यूपी में अपनी हैसियत को याद रखना चाहिए। बता दें कि यूपी में कांग्रेस की हैसियत सिर्फ एक लोकसभा सीट और दो विधानसभा सीटों की है। अखिलेश यादव का कांग्रेस पार्टी को बार बार उसकी हैसियत बताना क्या इस बात का संकेत है कि बंगाल और बिहार की तरह यूपी में भी इंडिया गठबंधन को झटका लग सकता?

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