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क्या ब्राह्मणों पर भाजपा का पेटेंट रहेगा बरकरार


क्या ब्राह्मणों पर भाजपा का पेटेंट रहेगा बरकरार

अमित बिश्‍नोई

यूपी की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय का अपना ही महत्त्व है, जिधर चला गया, 90 प्रतिशत सरकार बनने की गारंटी हो जाती है. जबतक कांग्रेस के साथ था तो उसने राज किया, बसपा के साथ गया तो मायावती ने शासन किया। भाजपा का हुआ तो भाजपा सत्ता के शिखर पर पहुँच गयी. समाजवादी पार्टी को एक अपवाद माना जा सकता है. आपको मालूम ही है कि विधानसभा चुनावों का नोटिफिकेशन 5 जनवरी के बाद कभी भी जारी हो सकता है इसलिए पार्टियों में ब्राह्मण वोटों के लिए सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है.

हालाँकि यूपी में ब्राह्मण सिर्फ 13 प्रतिशत ही हैं लेकिन ऐसा लोगों का मानना है कि यह जिधर भी जाते हैं एक साथ जाते हैं, तो ऐसे में यह आंकड़ा किसी भी पार्टी के लिए बहुत बड़ा हो जाता है. इन दिनों भाजपा का ब्राह्मणों पर पेटेंट है, ऐसा पार्टी मानती है लेकिन ब्राह्मण ऐसा मानते हैं, कुछ कहा नहीं जा सकता। जब से योगी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, तबसे ब्राह्मणों की भाजपा से नाराज़गी धीरे धीरे बढ़ती ही जा रही है, महाराज की कार्यशैली कुछ ऐसी है कि इस समाज में लगातार यह सन्देश जा रहा है कि भाजपा में ब्राह्मणों की उपेक्षा हो रही है. हालाँकि पार्टी इससे लगातार इंकार करती रही है. पर धुंआ वहीँ से उठता है जहाँ पर आग सुलग रही होती है. पार्टी के नेता लाख इंकार करें लेकिन यह सौ फ़ीसदी सच है कि भाजपा को ब्राह्मणों के भागने का डर सता रहा है.

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इसका सबसे बड़ा सबूत लखीमपुर काण्ड में घिरे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का लगातार बचाव करना है। इस मुद्दे को लेकर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों की काफी फ़ज़ीहत हुई है, चुनाव की दृष्टि से देखें तो इस बात से भाजपा को काफी नुक्सान पहुँच सकता है, इसके बावजूद भी वह अजय मिश्रा टेनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि ऐसा करने से उसे ब्राह्मण समाज में ग़लत सन्देश जाने का डर सता रहा है. इसमें कोई दो राय नहीं कि अजय मिश्रा टेनी की कुर्सी सिर्फ ब्राह्मण होने की वजह से बची हुई है वर्ना मोदी जी कब की उनके पैरों के नीचे से कुर्सी घसीट चुके होते, क्योंकि वह सबकुछ बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन चुनाव में घाटा हरगिज़ नहीं। 13 प्रतिशत का वोट बैंक उन्हें टेनी के खिलाफ एक्शन से रोक रहा है.

यही नहीं इस वोट बैंक को साधने और खुश करने के लिए भाजपा बड़ी गंभीरता से जुटी हुई है, मीटिंगों के दौर चल रहे हैं, यहाँ तक कि ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए और उनकी नाराज़गी दूर करने के लिए ऐसे लोगों को ज़िम्मेदारी दी गयी है जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धुर विरोधी कहा जाता है. दरअसल ऐसा करके भाजपा ब्राह्मणों को यह सन्देश देना चाहती है कि वह पार्टी के लिए कितना महत्वपूर्ण हैं और उसे इस समाज की कितनी चिंता है.

भाजपा किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहेगी कि ब्राह्मण वोट बैंक उससे छिटके। आपको याद ही होगा कि बीजेपी ने कांग्रेस के नेता जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल कर ब्राह्मणों को यह संदेश देने का प्रयास किया था कि यह समाज उसकी प्राथमिकताओं में है. प्रदेश की दूसरी पार्टियां भी जिस तरह से ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी हुई हैं उससे भी भाजपा परेशान है और उसे इस समाज के लिए ज़्यादा समय देना पड़ा रहा है, ज़्यादा शक्ति खर्च करनी पड़ रही है.

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देखने वाली बात यह होगी कि ब्राह्मण समाज क्या सोच रहा है, वैसे तो यह माना जाता है कि ब्राह्मण समाज को इस बात का अंदाजा पहले ही हो जाता है कि सत्ता बनी रहेगी या बदलाव होगा और इसी वजह से ब्राह्मण समाज हमेशा सत्ता के करीब रहता है और सरकार में भागीदार भी. बड़ा सवाल यह है कि भाजपा की कोशिशें रंग लाएंगी या फिर ब्राह्मण समाज को सत्ता में बदलाव का पता चल चूका है.

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