अमित बिश्नोई
रंग तो रंग होता है, फिर वो चाहे भगवा हो या हरा. यह रंग तो कुदरत की दें हैं, प्रकृति में चप्पे चप्पे पर मौजूद हैं तो फिर रंगों पर हंगामा क्यों? रंगों का पेटेंट क्यों? रंगों पर एकाधिकार की बातें क्यों? रंगों पर धर्म की मुहर क्यों? मगर देश की बदलती राजनीति में अब यह सब हो रहा है, लगातार हो रहा है और बढ़ता ही जा रहा है. जी हाँ ऐसा हो रहा है, आप सोच रहे होंगे कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ. मैं बात कर रहा हूँ दीपिका पादुकोण की बिकनी की जिसपर कल से बवाल मचा हुआ है और बवाल सिर्फ इसलिए है कि दीपिका ने शाहरुख़ खान की फिल्म पठान के एक गाने ‘बेशर्म रंग’ में जो ढेर सारी बिकनियाँ पहनी हैं उनमें से एक बिकनी का रंग ऑरेंज यानि कि भगवा है. मुझे तो वो ऑरेंज कलर ही नज़र आया लेकिन मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को उसमें भगवा रंग दिखाई दिया और फिर उनके बयान के बाद एक विवाद शुरू हो गया.
नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक उन्हें पहली नज़र में दीपिका की वेशभूषा विवादस्पद लगी. अब इस कथन तक तो मामला सही लग रहा था क्योंकि आप भारतीय संस्कृति की दुहाई देने का हक़ तो रखते हैं लेकिन इसके बात जब उन्होंने दीपिका की बिकनी के रंग को धर्म से जोड़ा तो मामला यहीं से विवादस्पद हो गया. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दीपिका ने भगवा रंग की बिकनी पहनी है और यह जानबूझकर किया गया है, इसे देश बर्दाश्त नहीं करेगा, देश का मतलब उनका हिन्दू समुदाय से शायद लग रहा था. नरोत्तम मिश्रा यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने आगे चेतावनी भी दे डाली कि फिल्म के दृश्यों में बदलाव किया जाय अन्यथा मध्य प्रदेश में फिल्म की रिलीज़ मुश्किल हो जाएगी। नरोत्तम मिश्रा के इस बयान के बाद इसमें हिन्दू सेना भी कूद पड़ी, फिर इसके बाद बॉयकॉट पठान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा जोकि कोई हैरानी वाली बात नहीं है क्योंकि पिछले कुछ समय से फिल्मों के बहिष्कार का एक फैशन चल पड़ा है.
बात अगर हम सिर्फ इस गाने की करें तो दीपिका ने इसमें पांच अलग अलग रंग की बिकनी पहनी हैं. गाने की शुरुआत में उन्होंने केसरी रंग की वन पीस कट साइज बिकनी पहनी है, इसके बाद उन्होंने गोल्डन कलर की एक भड़काऊ बिकनी धारण की, इसके बाद पर्पल कलर और मल्टी कलर की बिकनी पहनी है और सबसे अंत में उनकी टू पीस बिकनी का रंग ऑरेंज है जिसे भगवा बताया जा रहा है. अगर रंग की बात करें तो अबतक न जाने कितनी नायिकाओं ने इस रंग की बिकनी पहनी है, एक लम्बी फेहरिस्त है जिसमें रवीना टंडन, कैटरीना कैफ, वाणी, दिशा पाटनी, सुष्मिता सेन, उर्फी जावेद का नाम शामिल है, दीपिका ने भी पहली बार इस रंग की बिकनी नहीं पहनी है. तो इस तरह के विवाद पहले क्यों नहीं हुए? तो क्या यह कोई एजेंडा है जिसके तहत विवाद पैदा किया जा रहा है और एक ऐसे रंग जो ऊर्जा का प्रतीक है उसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.
इस विवाद पर पायल रोहतगी का ज़िक्र करना ज़रूर चाहूंगा। पायल अपने समय की बहुत बोल्ड एक्ट्रेस रह चुकी है. इसके साथ ही वो मोदी जी की बहुत बड़की वाली फैन और भाजपा की समर्थक हैं. उनका बयान इस मामले में काफी अहमियत रखता है. पायल ने तो सीधे रूप से नरोत्तम मिश्रा के इस बयान को दिमाग़ी दीवालियापन करार दिया। पायल के मुताबिक इसका मतलब है कि हरा रंग एक धर्म विशेष से ताल्लुक रखता है तो क्या वो रंग उनका हो गया. फिर दीपिका के कपड़ों पर हिन्दू धर्म से जुड़ा कोई प्रतीक भी नहीं था तो यह हिन्दू धर्म का अपमान कैसे हो गया. पायल के मुताबिक यह सिर्फ सस्ती पब्लिसिटी पाने का तरीका है और कुछ नहीं। इस तरह हर बात में धर्म को घुसेड़ना दरअसल धर्म का अपमान करना होता है. पायल वो अभिनेत्री हैं जिन्होंने JNU वाले मामले में दीपिका को आड़े हाथों लिया था मगर यहाँ पर उन्हें दीपिका की कोई गलती नज़र नहीं आती.
बात अगर नरोत्तम जी करें तो उन्होंने अपनी बात की शुरुआत में जो कहा था कि पहली नज़र में दीपिका की वेशभूषा आपत्तिजनक दिखाई देती जोकि काफी हद तक सही है. नरोत्तम मिश्रा अगर भगवा रंग की जगह बिकनी के साइज की बात करते तो उनकी बात में दम होता और उनको समर्थन भी मिलता। हालाँकि फिल्मों में किस तरह के कपडे पहने जाते हैं और किस तरह के दृश्य परोसे जा रहे हैं यह बहस का एक अलग विषय है. लेकिन यह बात सही है कि दीपिका ने पांच में से जो दो बिकनी पहनी हैं उसमें उनके वो अंग भी झलक रहे हैं जो नहीं झलकने चाहिए थे. तो बात लिबास तक सही थी लेकिन उसमें भगवा रंग डालकर विषय को बदरंग करने की कोशिश की गयी. या फिर ऐसा भी कहा जा सकता है कि यह कलर पर कब्ज़े का प्रयास है.
