सुप्रीम कोर्ट ने डीजीसीए से मांगा जवाब
नई दिल्ली : भारत में कोरोना के बीते 24 घंटे में 1543 नए केस आए हैं. लेकिन एक राहत भरी खबर यह है कि रिकवरी रेट 23.3 परसेंट हो गया है. कोविड-19 की चेन तोड़ने के लिए देशभर में 3 मई तक लॉकडाउन का पीरियड चल रहा है. इस बीच लॉकडाउन के दौरान रद की गई फ्लाइट सर्विस के लिए टिकट के पूरे पैसे लौटाए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट में बताया गया था कि सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों को सिर्फ लॉकडाउन के बाद बुक किए गए टिकट के पूरे पैसे लौटाने का आदेश दिया है. यह पैसे भी सीधे नहीं लौटाए जा रहे हैं. उन्हें क्रेडिट शेल में डाल दिया जा रहा है.
भेदभाव किया गया
प्रवासी लीगल सेल नाम की संस्था की तरफ से दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि 23 मार्च को सभी विमान सेवाएं रद कर दी गई थीं. उससे पहले लाखों लोगों ने एयर टिकट बुक करवा रखे थे. लेकिन 16 अप्रैल को जारी डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) का आदेश सिर्फ लॉकडाउन की घोषणा के बाद बुक किए गए टिकट के पूरे पैसे लौटाने को कहता है. इस तरह जिन लोगों ने लॉकडाउन के एलान से पहले टिकट बुक किए थे, उनके साथ भेदभाव किया गया है.
सिर्फ कुछ ही लोगो को क्यों लौटाए रुपए?
याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस एन वी रमना, संजय किशन कौल और बी आर गवई की बेंच ने डीजीसीए के आदेश को पहली नजर में मनमाना पाया. जस्टिस कौल ने कहा, “यह भेदभाव करने वाला आदेश है. अगर फ्लाइट सर्विस रद हुई है तो सिर्फ कुछ लोगों को टिकट के पूरे पैसे कैसे लौटाए जा सकते हैं? सबको एक जैसी राहत मिलनी चाहिए. इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

