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भारत में महामारी से निपटने के लिए माइक्रोफाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

प्रेस रिलीज़भारत में महामारी से निपटने के लिए माइक्रोफाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

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भारत में महामारी से निपटने के लिए माइक्रोफाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

महिलाएं अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और देश भर में लाखों छोटे व्यवसायों के पीछे उनकी ताकत हैं. मसालों के डिब्बों और तकियों में बचाए गई छोटी शुरुआत और छोटी बचत के साथ, वे अपने परिवार को सर्वोत्तम प्रदान करने का प्रयास करती हैं. उनकी दुनिया उनके परिवारों को अधिक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार करने के इर्दगिर्द घूमती है. वे बेहतर जीवन के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने को तैयार हैं. मामूली ऋण के रूप में एक छोटी सी सहायता उनकी लड़ाई को जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

कौटिल्या एक ऐसे समुदाय से संबंधित है, जो चंदेरी साड़ी बुनाई का एक्सपर्ट है. वह इनपुट खरीदने के लिए पूंजी की कमी के कारण इसे एक व्यवसायिक अवसर में परिवर्तित करने में असमर्थ थी और नतीजतन कौटिल्या को दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने के लिए मजबूर होना पडा. एक मज़दूर के रूप में वह प्रतिदिन 250 रुपये कमा पाती है. स्थानीय महाजन से लोन लेना ठीक नहीं था क्योंकि कौटिल्या को यकीन था कि वह दी जाने वाली ब्याज दरों को वहन करने में सक्षम नहीं होगा. आज, माइक्रोक्रेडिट की सहायता से, कौटिल्या कच्चा माल खरीदने के लिए विनियमित ब्याज दरों पर ऋण प्राप्त किया. उसने खुद को अब एक व्यवसायी के रूप में स्थापित किया, प्रति माह लगभग 10000 से 18000 तक कमाती है. वो सुंदर हस्तनिर्मित चंदेरी साड़ी बनाती है.

28 वर्षीय गौरम्मा एक ईंट भट्टे के बगल में रहती थीं, जहाँ उनके पति ट्रैक्टर चालक के रूप में काम करते थे. उसे एक बकरी फार्म शुरू करने के लिए एनबीएफसी माइक्रोफाइनेंस कंपनी से 10000 रुपये का सीड कैपिटल मिला. आज वह अपनी पारिवारिक आय में काफी इजाफा करती हैं. कभी भूमिहीन मजदूर रही एक महिला उद्यमी, अनीता ने एक व्यवसायी होने की खुशी का अनुभव किया है और एक दर्जी के रूप में सलाना 2 लाख रुपये कमा रही है. अपना व्यवसाय शुरू करने के लिएउसे बस एक छोटा सा लोन चाहिए था, जो उसे मिला. इनके जैसी अनगिनत कहानियों ने एक प्रेरणा दी है और अन्य उत्साही और उद्यमी महिलाओं को आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया है.

ये केवल तीन महिलाओं की कहानियां नहीं हैं, बल्कि एनबीएफसी-माइक्रोफाइनेंस संस्थानों द्वारा लाभांवित 3.2 करोड़ से अधिक ग्राहकों ने या तो छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं या उनका विस्तार किया है, जो स्वयं की पहचान बना रही हैं. इन सभी महिलाओं के लिए यह संभव हो गया है कि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) से आने वाली थोड़ी सी मदद से वे अपने बिजनेस के लिए ऋण ले सकें.

कोविड-19 महामारी ने पूरे देश को दहला दिया है. अर्थव्यवस्था पर जोरदार प्रहार हुआ है, और व्यवसायों पर प्रभाव काफी बुरा हुआ है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि ग्रामीण भारत ज्यादातर कृषि और आवश्यक सेवाओं पर आधारित है, जो ऐसे प्रभाव से काफी हद तक अप्रभावित रहते हैं. इसके अलावा, वे अपने उत्पादों की मांग में तेजी देख रहे हैं, जो कि ज्यादातर ग्राहकों द्वारा शीघ्र चुकौती के माध्यम से देखे गए और नए ऋणों की ताजा मांग हो रही है. इस महामारी के बीचे, अपने ग्राहकों से लोन की मांग में वृद्धि को देखते हुए एमएफआई अभिभूत हैं और इसने महिलाओं को नए ऋण देने शुरू कर दिए हैं.

चूंकि प्रत्येक माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ता स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में एक योगदानकर्ता है, इसलिए यह अनिवार्य है स्थानीय हितधारक भी सकारात्मक भूमिका निभाएं. हितधारक गाँव, राजनीतिक संगठनों, मीडिया, स्थानीय सरकार प्रशासन आदि के अग्रणी हो सकते हैं. ऐसे माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ताओं को समर्थन देना और प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है कि वे अपनी विभिन्न आवश्यकताओं के लिए निर्बाध औपचारिक पूंजी तक पहुँचने के लिए अपने क्रेडिट इतिहास को मजबूत रखें.

विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में ऐसे मामले हैं जहां एमएफआई ने कुछ अंशधारकों से मिले नकारात्मक हस्तक्षेप के कारण अपनी सेवाओं की पेशकश पूरी तरह से बंद कर दी, जिससे एमएफआई को अपने काम को सुचारू रूप से करने से रोका गया. इसके परिणामस्वरूप ऐसी अशिक्षित आबादी के लिए ऋण का अभाव उनके जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हमारे देश में एमएफआई अब भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अत्यधिक विनियमित हैं और कड़े मानदंडों,  ब्याज दरों और संग्रह के तौर-तरीकों के अधीन हैं. इसके अलावा, वे एमफिन और साधन जैसे स्व-विनियमन निकायों द्वारा भी संचालित होते हैं जो विभिन्न एमएफआई के संचालन की समीक्षा करते हैं. आज माइक्रोफाइनांस ग्राहकों के पास पिछले वर्षों के विपरीत ऐसे विनियामक निकायों के साथ अपने मुद्दों को उठाने का एक विकल्प है जो उन्हें ग्राहकों को सामान्य स्ट्रीम में बराबर करता है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सरकार ने ऐसे संस्थानों के महत्व को पहचाना है और पिछले कुछ वर्षों के दौरान उनमें से कुछ को बैंकिंग लाइसेंस प्रदान किए हैं.

माइक्रोफाइनेंस की मदद से महिला उद्यमी चुपचाप सफलता की कहानियां लिख रही हैं और अपने परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सुनिश्चित कर रही हैं. इन उद्यमियों को समर्थन देने के लिए माइक्रोफाइनेंस उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है, और यह महत्वपूर्ण है कि सभी संबंधित हितधारकों को एमएफआई के संचालन के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए अपना प्रयास करना चाहिए. इस प्रकार, अनीता, कौटिल्या और गौरम्मा जैसे लाखों माइक्रोफाइनेंस ग्राहक जो अपने व्यवसायों के लिए सूक्ष्म ऋण पर निर्भर हैं, उन्हें निर्बाध सेवाएं मिलती रहे.

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वर्तमान महामारी जैसी चरम परिस्थितियों में भी, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां अपने ग्राहकों को नए क्रेडिट के साथ समर्थन देना जारी रखे हुए हैं, जो उन्हें महामारी के कारण प्रभावित हुए ग्राहकों की आजीविका को फिर से शुरू करने में सक्षम बनाता है. हमारे देश में गरीब महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए दुनिया भर के विभिन्न विकास निकाय एमएफआई के साथ काम कर रहे हैं. ऐसे एमएफआई के अधिकांश कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर ही चुना जाता है, जिनकी माताएँ भी ऐसे एमएफआई की ग्राहक हैं. इस प्रकार, उन्हें अपने समुदाय की सेवा करने और सम्मान पाने के अलावा एक बेहतर जीवन जीने का अवसर मिलता है. ये युवक और युवतियां  हर दिन करोड़ों गरीब परिवारों से मिलते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें लोन उपलब्ध हों और सस्ती रहें. वे वित्तीय साक्षरता प्रदान करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य पहलुओं के बारे में कई अन्य जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो इन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं.  

देश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपनी सेवाओं को पहचानें, उनके प्रयासों के लिए समर्थन करें और असामाजिक तत्वों द्वारा को उनकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने से रोकें. इस प्रकार हमारे देश के सबसे कमजोर क्षेत्रों के लिए सस्ती ऋण उपलब्ध मिल सकें.

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