भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड पिछले कुछ महीनों में खिलाड़ियों के साथ साथ कप्तानी में भी लगातार प्रयोग कर रहा, हालाँकि कप्तान बदलने की वजहें भी हैं लेकिन पिछले सात महीनों में आठ खिलाडियों का टीम इंडिया की कप्तानी करना अपने आप में एक सवाल उठाता है, अब बस तीन और कप्तानों की ज़रुरत है और कप्तानों की एक इलेविन यानि पूरी टीम तैयार हो सकती है.
क्रिकेट के मौजूदा दौर में सिर्फ तीन अधिकृत फॉर्मेट हैं, आम तौर पर सफ़ेद बाल का अलग और रेड बाल की क्रिकेट के लिए अलग कप्तान का चलन हो गया है. कुछ जगह पर टी 20 और ODI के लिए अलग अलग कप्तान हैं और टेस्ट के लिए अलग , मगर टीम इंडिया पर नज़र डालें तो कहने को रोहित शर्मा तीनों फॉर्मेट के कप्तान हैं लेकिन जब हम पिछले सात महीनों की क्रिकेट पर नज़र डालते हैं तो हमें आठ कप्तान नज़र आते हैं. हालाँकि इसके पीछे बोर्ड की कुछ मजबूरियां भी हैं. रोहित शर्मा के अनफिट होने पर दुसरे लोगों को मौका मिला, उनमें से अनफिट होने पर तीसरे को मौका मिला लेकिन इसके बावजूद अगर आप देखेंगे तो कभी ऋषभ पंत, कभी के एल राहुल, कभी हार्दिक पंड्या तो कभी शिखर धवन, यहाँ तक कि उप कप्तान भी निश्चित नहीं है कि किस सीरीज़ में कौन बनेगा। अगर वही फिक्स हो जाये तो भी इंजरी की हालत में कप्तानी का मसला सुलझ सकता है.
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कप्तानी में बार बार बदलाव से निश्चित रूप से टीम में समस्या तो पैदा ही होती है, एजबेस्टन टेस्ट को ले लीजिये, अचानक जसप्रीत बुमराह को कप्तानी थमा दी गयी और भारत इस मैच में पकड़ बनाने के बाद मैच हार गया, बुमराह को कप्तानी सौंपने पर सबने सवाल किया, सवाल यह उठता है कि ऋषभ पंत को एमरजेंसी में कप्तानी क्यों नहीं सौंपी गयी, उन्होंने तो टीम इंडिया की भी कप्तानी है और आईपीएल में भी. BCCI का यह प्रयोग क्यों और कब तक चलेगा। अगर बोर्ड को बुमराह में भविष्य नज़र आता है तो उसे परमानेंट उपकप्तान बना देना चाहिए ताकि कप्तानी का उसे अनुभव मिले।

