लखनऊ। ईआरपी व्यवस्था (ERP system) की तरह संयोजन से स्टोर, बिलिंग संशोधन और बिजली चोरी के मामलों में संशोधन की प्रक्रिया को पूरी ऑनलाइन की जाए। इसके अलावा ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे कि उपभोक्ता और आवेदक दोनों को सभी प्रपत्र ऑनलाइन ही दिख जाएं। यह मांग उपभोक्ता परिषद (Consumer counsil) ने की है। साथ ही नियामक आयोग और नयी सरकार के गठन के ऊर्जा मंत्री से भी बात करने का आश्वासन दिया है। इसके अतिरिक्त अगर इससे भी मांग पूरी नहीं होती है तो राज्य सलाहकार समिति की मीटिंग में एक प्रस्ताव लाया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने दी है।
Read also- हिमालय में 9000 फीट पर अलखनाथ पूजा की धूम, इसे खुदा पूजा भी कहते हैं
अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि सभी बिजली कम्पनियों में वर्तमान में इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्लानिंग ईआरपी व्यवस्था लागू की जा रही है। ऑनलाइन होने से निश्चित ही पारदर्शिता कायम होगी। ऐसे में उपभोक्ता संयोजन लेने की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन हो। आवेदक द्वारा संयोजन की औपचारिकता पूरी करते ही उसका स्टीमेट स्वत: ऑनलाइन बनकर आवेदक को दिखने लगे। प्रदेश के सभी स्टोरों की सामग्री ऑनलाइन हो, उसे उपभोक्ता भी वेबसाइट पर देख सकें। कॉस्ट बुक के अनुसार जो भी स्टीमेट बने, वह स्वत: कैलकुलेट आधारित हो। सभी डिवीजन अपने ट्रांसफार्मर की उपलब्ध संयोजन क्षमता भी सार्वजानिक करे। जैसे उपभोक्ता को कोई यह झांसा न दे पाये कि कैपेसिटी ट्रांसफार्मर में है कि नहीं। कई जगहों पर उपभोक्ता को ओवरलोड सिस्टम बताकर भारी धनराशि का स्टीमेट जारी कर दिया जाता है और सबसे बड़ा चौंकाने वाला मामला यह है कि वर्षों से स्टोरों में सामान नहीं है। जिससे हजारों उपभोक्ता पैसा जमा कर घूम रहे हैं और परेशान हो रहे हैं, इस पर भी अबिलम्ब विभाग को निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों हाई कोर्ट द्वारा अपने एक अंतरिम निर्णय में उपभोक्ताओं को गलत बिजली बिल भेजने को आपराधिक कृत्य तक करार दे दिया। ऐसे में अब समय आ गया है बिजली कम्पनियां पारदर्शिता को हर स्तर पर लागू करें जिससे उपभोक्ताओं का उत्पीड़न न हो।
Read also- Yogi Government द्वारा इस वादे को पूरा करते ही यूपी बन जाएगा ऐसा करने वाला देश का छठवां राज्य
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा ने कहा उपभोक्ता का कोई काम जो बिजली विभाग से होना है और उसमें वित्तीय वयवस्था जुड़ी है, वह ऑनलाइन होना आवश्यक है। बिजली चोरी से लेकर बिलिंग संशोधन के रफ नोट, जिसे विभाग आर -2 भी कहता है, वह भी ऑनलाइन हो। जिसे उपभोक्ता देख सके और उस पर उसे कोई संदेह हो तो वह चैलेंज कर सके। बहुत जल्द ही उपभोक्ता परिषद इस पूरी वयवस्था को ऑनलाइन करने के लिए नियामक आयोग और सरकार गठन के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से भी बात करेगा और जरूरी हुआ तो आगामी राज्य सलाहकार समिति की मीटिंग में एक प्रस्ताव इससे सम्बंधित ले जायेगा।

