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Political News: आज़ाद उम्मीदवार क्यों बने सिब्बल?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने आज सपा के समर्थन से राज्यसभा के लिए नामांकन किया, उन्होंने अखिलेश और आज़म खान का शुक्रिया भी अदा  किया, विपक्षी नेताओं से अपने मधुर सम्बन्धो की बात भी कही, मगर सवाल यह उठ रहा है कि वह राज्यसभा में एक आज़ाद उम्मीदवार के रूप में क्यों जाना चाह रहे हैं, क्यों उन्होंने समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनना पसंद नहीं किया, शायद अब वह किसी और राजनीतिक पार्टी का अपने ऊपर ठप्पा नहीं चाहते? 

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सिब्बल ने कांग्रेस नहीं बल्कि गाँधी फैमिली से अपने 30-31 सालों से रिश्ता तोड़ने की बात कही और सही वक्त को भी चुना क्योंकि उनका राजयसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, राज्यसभा में रहना उनकी ख्वाहिश भी थी, मौका भी सही था। आज़म खान को बड़ी राहत भी दिलाई थी, अखिलेश और आज़म में दूरियां भी बढ़ रही थीं, आज़म खान उनके एहसानमंद भी थे और सपा की हैसियत भी बढ़ चुकी थी कि वह कम से कम तीन लोगों को राज्यसभा भेज सके। 

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चाँद ट्वीट करते हैं कि वीरेंद्र भाटिया के दुनिया से जाने के बाद समाजवादी पार्टी को एक अच्छे वकील की आवशयकता थी। अखिलेश यादव ने उनके एक अच्छे वकील के साथ राजनीतिक अनुभव की बात कही, अखिलेश ने यह भी कहा कि उन्होंने बड़े बड़े नामी मुकदमों को जीता है। पार्टी की और इस तरह के बयान यह तो साबित ही करते हैं कि भले वह उच्च सदन में सदन के आधिकारिक नुमाइंदे न हों लेकिन समाजवादी पार्टी के मुद्दों को समर्थन करने के लिए कोई मजबूत आवाज़ ज़रूर मौजूद रहेगी।

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वहीं कपिल सिब्बल ने आज समान विचारधारा के नेताओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की भी बात कही और इस बारे में आने वाले दिनों में प्रयास करने की बात कही. कांग्रेस पार्टी पर वह किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से बचे और कहा कि मैं अब कांग्रेस में नहीं इसलिए उसपर प्रतिक्रिया देना मेरे लिए उचित नहीं है। कपिल सिब्बल ने यह भी बताया कि राज्यसभा के लिए उन्होंने अखिलेश यादव से बात की थी मगर इस शर्त पर कि मैं पार्टी ज्वाइन नहीं कर सकता, मुझे समर्थन देकर राज्यसभा पहुँचने में मदद करेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी।

कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा उन्होंने आज नहीं बल्कि 16 मई को दिया था, खबर है कि सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी ने उन्हें मनाने और समझाने की बहुत कोशिश की थी मगर उनकी कोई कोशिश काम नहीं आयी. दरअसल कपिल सिब्बल की नाराज़गी की वजह यह थी कि राहुल गाँधी बिना किसी पद के पाती के सारे निर्णय ले रहे थे, कपिल सिब्बल और दुसरे बाग़ी कांग्रेसी नेताओं का यही कहना था कि या तो राहुल गाँधी ज़िम्मेदारी लें या फिर चुनाव कराकर कांग्रेस पार्टी के लिए कोई फुल टाइम अध्यक्ष चुना जाय।

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