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पूर्वांचल पर क्यों है सभी दलों की नजर, गोरखपुर से योगी के ऐलान के बाद अब अखिलेश आजमगढ़ से लड़ेंगे!


पूर्वांचल पर क्यों है सभी दलों की नजर, गोरखपुर से योगी के ऐलान के बाद अब अखिलेश आजमगढ़ से लड़ेंगे!

लखनऊ। देश की सियासत में कहावत है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी तर्ज पर कहा जाता है कि लखनऊ का रास्ता पूर्वांचल तय करता है। यानी की पूर्वांचल में जिस दल की धाक होती है, लखनऊ का ताज उसके सिर पर होता है। यह महज कहावत नहीं है बल्कि चुनावी आंकड़े इस बयान की तस्दीक करते हैं। गौरतलब है कि पूर्वांचल में करीब 164 सीटें हैं, जबकि यूपी में पूर्ण बहुमत के लिए 202 सीटों की आवश्यकता होती है। पिछले तीन चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो 2007 में बसपा ने पूर्वांचल की 85 सीटों को अपने नाम किया था और 207 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। तब सपा को पूर्वांचल में 48, बीजेपी को मात्र 13, कांग्रेस को नौ सीटें मिली थीं। बाकी निर्दलीय और छोटे दलों ने जीत हासिल की थी। उसके बाद 2012 में अखिलेश यादव की लहर में सपा को 102 सीटें मिलीं थीं। बसपा का ग्राफ काफी नीचे आया और 22 सीटें मिली थीं। वहीं भाजपा को 17 और कांग्रेस ने चौंकाते हुए 15 सीटों पर पताका फहराई थी। उसके बाद 2017 में हुए चुनाव में हिंदुत्व की लहर में भाजपा 17 से सीधे 115 सीटें अपने नाम कर ली थीं। यहां पर सपा को 17 और बसपा को 14 सीटें मिली थीं, वहीं कांग्रेस मात्र 02 सीटों पर ही अटक गई थी।

पिछले तीन चुनाव इस बात के गवाह हैं कि पूर्वांचल में सबसे ज्यादा सीटें अपने नाम करने वाली पार्टी ही यूपी की सत्ता के करीब मानी जाती है। यही कारण है कि इस बार सभी दलों का फोकस पूर्वांचल पर है। पूर्वांचल की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का मथुरा के बाद अयोध्या से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी। लेकिन, ऐन वक्त पर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर की शहर विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया। हालांकि उनका निर्णय चौंकाने वाला जरुर था लेकिन इसके पीछे सियासी अहमियत यह थी कि गोरखपुर से सीएम योगी चुनाव लड़कर पूरे पूर्वांचल को साधने की कोशिश करेंगे। अगर उनकी यह रणनीति कामयाब होती है तो एक बार फिर यूपी भाजपा का राह आसान हो सकती है।

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पूर्वांचल की नाराजगी के अहसास ने सीएम को बुलाया

पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन का असर साफ दिख रहा है। वहीं पूर्वांचल में भी बीजेपी के लिए बहुत अच्छी स्थिति नहीं मानी जा रही है। यह बीजेपी का आंतरिक सर्वे भी कह रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं। पूर्वांचल में जाति की सियासत काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि यहां पर कभी सपा और बसपा का एकछत्र राज हुआ करता था। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की रंग दिखाती हिंदुत्व की सियासत ने सपा-बसपा को फिका करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन, आवारा जानवरों की परेशानी, बेरोजगारी और पूर्वांचल की अनदेखी ने बीजेपी की बेचैनी बढ़ाई है। पूर्वांचल में युवाओं का एक बड़ा तबका महानगरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। इस बीच बेरोजगारी की समस्या, एक के बाद एक हुए पेपर लीक कांड, रोजगार मांगते युवाओं पर लाठीचार्ज ने युवाओं में भाजपा के प्रति रोष बढ़ाया है। भाजपा भी इस नाराजगी को महसूस कर रही है। यही कारण है कि सीएम योगी को गोरखपुर से उतारा गया है। जहां से हिंदुत्व की सियासत के रंग को एक बार और गाढ़ा किया जा सके।

अब अखिलेश की एंट्री से दिलचस्प हुई सियासत

इस बीच अखिलेश यादव के आजमगढ़ की गोपालपुर सीट से चुनाव लड़ने की कवायदें शुरू हो गईं हैं। हालांकि अखिलेश यादव ने इसकी पुष्टि तो नहीं की है लेकिन उनके बयानों ने काफी हद तक इस रहस्य से पर्दा हटा दिया है। अखिलेश यादव के आजमगढ़ से लड़ने से पूर्वांचल में सियासी पारे का गरमाना तय है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव आजमगढ़ की संसदीय सीट से लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में विधानसभा भी आजमगढ़ से लड़ने का संकेत देकर उन्होंने साफ कर दिया है कि पूर्वांचल की पकड़ को छोड़ा ना जाये। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा के महागठबंधन को सबसे ज्यादा फायदा पूर्वांचल से ही हुआ है। ऐसे में अखिलेश यादव इस रिदम को बनाये रखना चाहते हैं।

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सबकी नजर पर पूर्वांचल पर

हालांकि पूर्वांचल में पर सभी दलों की नजर है। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से यहां की सियासत काफी दिलचस्प हो गई है। लेकिन इसके लिए पहले से जाल बिछाये जाने लगे थे। मोदी और अमित शाह ने पूर्वांचल के बनारस में रैलियां की तो, अखिलेश ने ओमप्रकाश राजभर की मऊ रैली से इसकी शुरूआत की। वहीं प्रियंका गांधी ने भी गोरखपुर में अपना दम दिखाया। जबकि मायावती ने मऊ के भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पहले ही संकेत दे दिया था कि पूर्वांचल उनके लिये कितना अहम होने जा रहा है।

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