लखनऊ। समाजवादी पार्टी का राज्य सम्मेलन आज बुधवार को लखनऊ में हुआ। इसमें प्रदेश कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी और सदस्य एकत्र हुए। इसी में नरेश उत्तम को फिर से पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। बता दें कि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद पर होते हुए सपा नरेश उत्तम के नेतृत्व में दो बाद विधानसभा चुनाव और एक बार लोकसभा चुनाव हार चुकी है। इसके बाद भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नरेश उत्तम पर भरोसा जताया है। वह भी ऐसे समय में जबकि आने वाले दिनों में प्रदेश में निकाय चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।
सवाल ये उठ रहा है कि आखिर नरेश उत्तम को सपा ने फिर से प्रदेश अध्यक्ष क्यों बनाया। इसके पीछे समाजवादी पार्टी की क्या रणनीति है? अखिलेश यादव ने 2024 के लिए ऐसी क्या योजना बनाई है? नरेश उत्तम पटेल समाजवादी पार्टी की स्थापना के समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं। नरेश उत्तम ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की। 1989 से 1992 के बीच उन्होंने जनता दल कार्यकर्ता के रूप में काम किया था। वह मुलायम सिंह यादव के करीबियों में एक हैं। 1989 में जब मुलायम मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने नरेश उत्तम पटेल को भी मंत्री बनाया।
नरेश फतेहपुर के जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र से 1989 में पहली बार चुनाव जीता था। नरेश तीन बार विधायक रहे। नरेश उत्तम के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से सपा दो बार विधानसभा चुनाव हार चुकी है और एक बार लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से पस्त हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नरेश उत्तम सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बहुत ही करीबी हैं। संगठन में नरेश का अनुभव काफी अच्छा है। वह उन दिनों से सपा में हैं, जब पार्टी की स्थापना हुई थी। ऐसे में अखिलेश नरेश उत्तम पर पूरा भरोसा कर सकते हैं। हालांकि, बड़ा कारण ये भी है कि वह कुर्मी जाति से हैं। उप्र में कुर्मी मतदाताओं की आबादी करीब सात फीसद है। इस बार विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी पटेल और मां कृष्णा पटेल को सपा से चुनाव लड़ाया था। जिसका लाभ उन्हें मिला। पल्लवी ने सिराथू से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को मात दी थी। यही कारण है कि नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर रखने से अखिलेश को आने वाले चुनावों में बड़ा फायदा दिख रहा है। इसी कारण से नरेश को एक बार फिर यूपी की बागड़ोर सौंपी गई है।
