बिहार में किसका होगा खेला?

आर्टिकल/इंटरव्यूबिहार में किसका होगा खेला?

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अमित बिश्नोई
बिहार में नितीश कुमार ने राष्ट्रिय जनता दल का साथ छोड़ और भारतीय जनता पार्टी का हाथ पकड़कर सरकार तो बना ली लेकिन असली खेला अभी बाक़ी है। 12 फरवरी को बिहार में फ्लोर टेस्ट होना है और उससे पहले बिहार की राजनीति में दो तरह के ऑपरेशन चलने की बात हो रही है. आम तौर पर लोग सिर्फ ऑपरेशन लोटस के बारे में जानते हैं, बहुत से राज्यों में इस ऑपरेशन की मदद से सरकारों को बदल दिया गया या बनती हुई सरकारों को बदल दिया गया. लेकिन इस बार एक नए राजनीतिक ऑपरेशन ‘लालटेन’ का भी नाम चल रहा है और इसीलिए कहा जा रहा कि बिहार में इस बार कुछ भी हो सकता है. मामला 24 घंटे का है , विधायक दड़बे में बंद है और ये दड़बा 12 फरवरी को ही खुलेगा। तब देखा जायेगा कि किस दड़बे से कितने विधायक बाहर निकले, क्योंकि संख्या को लेकर तरह तरह की बातें चल रही हैं.

बताया जा रहा है कि राजद ने तेजस्वी यादव के घर पर अपने विधायकों को मेहमान बनाकर खा है, 100 खाटें मंगाई गयी है, मतलब 100 लोगों का इंतज़ाम है, अब आप अंदाज़ा लगाइये कि इसमें राजद विधायकों की कितनी खाटें हैं, वैसे राजद के विधायकों की संख्या तो 79 है. हो सकता है कि खेला करने वाले कुछ विधायकों के लिए भी खाटों का इंतज़ाम किया गया हो. वैसे राजद का कहना है कि ये इंतज़ाम इसलिए किया गया है क्योंकि पार्टी के सभी विधायक एकसाथ रहकर अपनी एकता का प्रदर्शन करना चाहते हैं। राजद का ये भी कहना है कि जदयू विधायक नितीश कुमार की पलटी मारने की आदत से अब परेशान हो चुके हैं। बिहार के युवाओं में आक्रोश है, सड़कों पर मार्च निकल रहे हैं. जदयू विधायक भी जानते हैं कि आने वाले चुनाव में इस आक्रोश का उन्हें सामना करना पड़ेगा इसलिए बहुत से जदयू एमएलए फ्लोर टेस्ट में कहीं और बैठे हुए नज़र आ सकते हैं। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी तो खुले आम ऑपरेशन लालटेन की बात करते हैं। वो स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि इसबार ऑपरेशन लोटस नहीं लालटेन चलेगा।

राजद नेता की बात में थोड़ा दम भी लगता है क्योंकि एक दिन पहले ही नितीश कुमार ने अपने मंत्री श्रवण कुमार के घर पर सारे पार्टी विधायकों को खाने पर बुलाया था ताकि एकजुटता का सन्देश जा सके लेकिन बताया जाता है कि डिनर पार्टी में काफी बवाल हुआ क्योंकि आधा दर्जन के लगभग विधायक किसी न किसी बहाने इस बैठक में नहीं पहुंचे थे और नितीश कुमार बहुत जल्द ही इस बैठक को छोड़कर चले गए थे. जिस समय वो बैठक से बाहर निकले थे काफी गुस्से में नज़र आ रहे थे और ये गुस्सा विधायकों की गैरमौजूदगी की वजह से ही था. नितीश के इस रवैये से ही ऑपरेशन लालटेन के दावे को बल मिलता है। हालाँकि नितीश ने 11 फरवरी की शाम एक और डिनर पार्टी का आयोजन किया है और कहा जा रहा है कि इस बार सभी जदयू विधायक साथ में खाना खाएंगे। खैर ये तो शाम को ही पता चलेगा।

राजद और जेडीयू से अलग भाजपा ने अपने विधायकों को ट्रेनिंग के बहाने बोध गया भेज दिया था वहीँ कांग्रेस ने अपने विधायकों को बिहार से बाहर हैदराबाद रवाना कर दिया था, जो आज पटना लौटेंगे और तेजस्वी के घर अरेंज की गयी खाटों पर ही सोयेंगे। कांग्रेस पार्टी का अपने विधायकों को बिहार से बाहर भेजना समझ में आता है, क्योंकि खरीद फरोख्त का सबसे ज़्यादा खतरा उन्हीं पर रहता है. वैसे सदन में संख्या बल के हिसाब से तो NDA ही फिलहाल भारी दिखता है. उसके खेमे में 243 वाली विधानसभा में 128 विधायक हैं वहीँ राजद के खेमे में 114. यानि 14 विधायकों का अंतर और यही अंतर खेले वाला है. उधर गवर्नर हाउस अलग ही तैयारी करता नज़र आ रहा है, खबर है कि फ्लोर टेस्ट से पहले गवर्नर साहब ने अपने कानूनी सलाहकार ही बदल दिए हैं. तो मतलब तैयारी हर तरफ से है. सरकार की तरफ से भी, विपक्ष की तरफ से भी और दिल्ली दरबार से भी. अब देखना है कि किसका खेला कल बिहार में कामयाब होगा?

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