सल्ट उपचुनाव जीतने के बाद सीएम रावत के चुनाव लड़ने पर टिकी निगाहें
मई माह में ही किसी सीट को रिक्त घोषित करना है आवश्यक
देहरादून। सल्ट उपचुनाव में भाजपा प्रत्यशी महेश जीना को मिली जीत के बाद अब भाजपा ही नहीं बल्कि प्रतिद्वंदी पार्टियों की निगाहें भी सीएम तीरथ सिंह रावत परी आकर टिक गयी हैं। दरअसल तीरथ सिंह रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री तो बन गये हैं मगर वह विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें नौ सितंबर से पहले विधानसभा की सदस्यता लेने के लिये किसी विधानसभा से जीत हासिल करना आवश्यक है। सितंबर में चुनाव कराने के लिये मई माह में ही किसी सीट को रिक्त घोषित करना आवश्यक होगा। ऐसे में अब सबकी निगाह सीएम के चुनाव लड़ने पर आकर टिक गयी है।
प्रदेश भाजपा और कांग्रेस के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी सल्ट विधानसभा सीट पर भाजपा ने बाजी मारी और उनके प्रत्याशी महेश जीना ने शानदार जीत हासिल की। सीएम तीरथ सिंह रावत के लिये पहली परीक्षा मानी जा रही इस सीट पर जीत ने मुख्यमंत्री को राहत दी है। अब सभी की निगाह सीएम रावत के चुनाव लड़ने की घोषणा पर जा टिकी है। सीएम रावत को इसी माह यह तय करना होगा कि वह किस विधानसभा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। नियमानुसार सांसद या गैर विधायक के सीएम बनने पर उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा की सदस्यता हासिल करनी होती है। यदि इस दौरान संबंधित व्यक्ति विधायक नहीं बनता है तो उन्हें सीएम के पद से इस्तीफा देना होगा।
गत 22 मार्च को गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत का निधन हो जाने के बाद यह सीट वर्तमान में रिक्त चल रही है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि सीएम रावत गंगोत्री सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं। मगर सीएम के लिये गंगोत्री नया चुनावी मैदान होगा जिसमें उतरने से वह परहेज कर सकते हैं। ऐसे में संभावना यह भी है कि सीएम के लिये वर्तमान विधायकों में से कोई अपनी सीट खाली कर दे ताकि सीएम जीत हासिल कर विधानसभा का सदस्य बन सके। प्रदेश भाजपा में इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि सीएम रावत के लिये सबसे सुरक्षित सीट कौन सी होगी जिस पर उनकी जीत सुनिश्चित हो। अब देखना होगा कि मई के महीने में भाजपा संगठन और सीएम रावत किस निर्णय पर पहुंचते हैं। वहीं विपक्षियों को भी भाजपा के कदम का इंतजार है ताकि उसके मुताबिक वह भी अपनी चुनावी चाल आगे बढ़ा सकें।

