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कौन हैं इकरा हसन, जिन्होंने लंदन में किया था सीएए का विरोध, अब यूपी में लड़ेंगी चुनाव

आर्टिकल/इंटरव्यूकौन हैं इकरा हसन, जिन्होंने लंदन में किया था सीएए का विरोध,...

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पारुल सिंघल

Iqra Hasan:पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीते कुछ सालों से पलायन को लेकर चर्चा में रहा कैराना अब इकरा हसन के चलते भी काफी सुर्खियां बटोर रहा है। 2024 के आम लोक सभा चुनावों के सियासी समर में साधारण सी दिखने वाली इकरा की चर्चा दिल्ली तक है। कौन हैं इकरा और आखिर क्यों इन दिनों हर कोई उनका जिक्र कर रहा है। कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने इन चुनावों में इकरा हसन को अपना प्रत्याशी बनाया है। राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली इकरा विधायक नाहिद हसन की छोटी बहन हैं। उनकी मां तबस्सुम भी दो बार कैराना से सांसद रह चुकी हैं। एक बार बसपा से और दूसरी बार सपा रालोद गठबंधन से उन्होंने चुनाव जीता था। वहीं इकरा के पिता मुन्नवर हसन सबसे कम उम्र के चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।
उनका यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में भी दर्ज हुआ है। इकरा खुद भी 9 वर्ष पहले समाजवादी पार्टी के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ी थीं लेकिन उस वक्त उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

लंदन में कर चुकी हैं सीएए का विरोध, बनना था प्रोफेसर

इकरा हसन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। लॉ में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए वह लंदन गई थी। इस दौरान उन्होंने सी ए ए का प्रोटेस्ट किया था जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। लंदन में पढ़ने के बावजूद इकरा अपनी सादगी को लेकर भी चर्चा में हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने भाई नाहिद हसन के जेल जाने के बाद उनके लिए चुनाव लड़ा था और जीत दिलाई थी।
राजनीति में रसूख रखने वाले परिवार से ताल्लुक होने के बाद भी इकरा का इरादा इस क्षेत्र में आने का नहीं था। इकरा कहती हैं की अपनी मास्टर्स डिग्री के बाद वह पीएचडी करना चाहती थीं। उनका इरादा प्रोफेसर बनकर पढ़ाना था। परिस्थितिवश वह राजनीति में आ गई। अब परिवार की विरासत को आगे बढ़ाएंगी।

राजनैतिक गुरु जयंत पर बड़ी भविष्यवाणी

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को लेकर भी इकरा हसन ने बड़ी बात कही है। जयंत चौधरी को अपना राजनैतिक गुरु मानने वाली इकरा कहती है कि वह जरूर किसी दबाव के चलते ही भाजपा में शामिल हुए हैं हालांकि इसका बहुत अधिक प्रभाव क्षेत्र में नहीं दिख रहा है। मुस्लिम समाज के साथ ही अब जाट भी उनके साथ खड़े हैं। वह कहती है भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन दलों का है, दिलों का नहीं है जल्द ही जयंत चौधरी वापस लौट आएंगे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में इकरा को जयंत चौधरी ने राजनीति के बड़े दांव पेंच सिखाए थे। उन्होंने इकरा के साथ घर घर जाकर जनसंपर्क भी किया था। यही नहीं गठबंधन से उनकी मां तबस्सुम को सांसद बनाने में भी जयंत चौधरी की मुख्य भूमिका रही थी। बताया जाता है की 2018 के उपचनावों में जयंत चौधरी ने तबस्सुम के साथ जनसंपर्क किया था। लोगों से उनके लिए वोट मांगे थे। यही नहीं 15वीं लोकसभा में यूपी की 80 सीट पर एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीता था। कैराना से भाजपा के सांसद रहे हुकुम सिंह की मौत के बाद हुए उपचुनावों में जयंत चौधरी ने मुस्मिल प्रत्याशी तबस्सुम को चुनाव लड़वाया था और उन्हें जीत दिलवाकर संसद भेजा था।

लोकल मुद्दों को बनाया है चुनावी हथियार

भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी के सामने खड़ी इकरा हसन बीजेपी पर सीधा निशाना साधती हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने हमेशा से ही कैराना में पलायन को बहुत बड़ा मुद्दा बनाकर लोगों को भड़काने का प्रयास किया है और इस जिले को देश भर में बदनाम कर दिया। यहां पलायन के पोस्टर चित्रकूट तक लगाए गए। मुजफ्फरनगर दंगों और पलायन को चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा जीतने का प्रयास कर रही है। हालांकि यह दोनों ही मुद्दे यहां के नहीं हैं।मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान भी कैराना में शांतिपूर्ण स्थिति थी। वह कहती हैं कि पलायन का भी यहां कोई मुद्दा नहीं है। कुछ दो चार परिवार व्यापार के चलते यहां से दूसरी जगह चले गए उसी को भाजपा ने बढ़ा चढ़ाकर पलायन का नाम दे दिया। जबकि इस तरह की चीज अन्य जगहों पर भी आम तौर पर दिखाई देती हैं। वह कहती हैं कि भाजपा के पास कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। वह राम मंदिर को भुनाने का प्रयास कर रही हैं। जबकि लोग स्थानीय मुद्दों पर, स्थानीय समस्याओं के आधार पर अपना जनप्रतिनिधि चुनना चाहती हैं। इसी लिए वह लोगों के बीच में पहुंच रहीं हैं। वहां की समस्याओं को जानने का प्रयास कर रही हैं।उन्हें मुस्लिम वर्ग के साथ ही जाट समुदाय का भी साथ मिल रहा है। वह कहती है कि यदि केंद्र में उनकी सरकार आती है तो वह लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने की दिशा में प्रयास करेंगी। यदि लोकसभा सीट जीत जाती हैं तब भी उनका फोकस लड़कियों की उच्च शिक्षा में आ रही समस्याओं और उनके विकास की योजनाओं पर कार्य करने पर ही रहेगा। उनका कहना है कि इकरा का अर्थ पढ़ने से है और अपनी पढ़ाई और तालीम के बलबूते ही वह जीत कर शिक्षा पर कार्य करने के प्रयास करेंगी।

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