आजमगढ़: बोर्ड परीक्षा के दौरान बलिया में पेपर लीक मामले में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा के बड़ी संख्या में विधायक व जिलाध्यक्ष आजमगढ़ के जिला कारागार में बंद तीन पत्रकारों से मिलने पहुंचे। लेकिन जेल अधीक्षक ने मिलने की अनुमति नहीं दी। इस कारण सपा के विधायकों को जेल से खाली हाथ लौटना पड़ा। इसको लेकर सपा के नेताओं ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। सपा नेताओं का कहना है कि यह सरकार हिटलरशाही पर उतारू है और लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
सपा के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि भाजपा सरकार संविधान में प्रदत्त अधिकारों को कुचल रही है। कोई व्यक्ति सरकार की जन नीतियों का विरोध कर रहा है या शासन प्रशासन के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है तो उसके विरुद्ध फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल में डाल दिया जा रहा है।
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आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पुलिस प्रशासन के जरिए दमनकारी रवैया से डराया धमकाया जा रहा है। इसके साथ ही बिना साक्ष्य व सबूत देखें बुलडोजर का भय पैदा कर दिया जा रहा है। आज देश में अघोषित आपातकाल लागू है। पत्रकारिता जो चौथा स्तंभ माना गया है उसको भी स्वतंत्रता से काम नहीं करने दिया जा रहा है।
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जिन जिलों में सपा के लोग जीते हैं वहां के अधिकारियों का तबादला कर उनका मनोबल तोड़ने का काम किया जा रहा है। पर सपा जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। इस प्रतिनिधिमंडल में सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, विधायक नफीस अहमद, विधायक आलमबदी व जिला उपाध्यक्ष विवेक सिंह शामिल थे। इससे पहले कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी पत्रकारों ने मिलने का प्रयास किया था,लेकिन प्रशासन ने मिलने की इजाजत नहीं दी।

