मेरठ। चुनाव के बाद शुरू हुए ओपिनियन और एग्जिट पोल (exit poll) से इस समय टीवी और प्रिट मीडिया के अखबार भरे हुए हैं। लेकिन इन ओपिनियन पोल की शुरूआत आखिर कहां से हुई और ये देश में कैसे आए। बता दें कि आज से करीब 2 दशक पहले तक किसी भी प्रकार का कोई ओपिनियन पोल देश में नहीं था। चुनाव होते थे और उसके बाद सीधे मतगणना के दिन तक परिणाम का इंतजार करना होता था। लेकिन अब तक ये ओपिनियन और एग्जिट पोल मतगणना से पहले ही पूरी चुनाव मतगणना का बैड बजा देते हैं और पूरी सटीक जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
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दुनिया में चुनावी सर्वे की शुरुआत करने वाला पहला देश अमेरिका (America) है। अमेरिका में अमेरिकन सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने पहली बार सर्वे किया था। इसके बाद 1937 में ब्रिटेन ने और 1938 में फ्रांस ने अपने यहां सर्वे की शुरूआत कराई। इसके बाद तो चुनाव पूर्व सर्वें की शुरूआत डेनमार्क, जर्मनी, आयरलैंड और बेल्जियम में भी शुरू हुई। वैसे बताया जाता है कि एग्जिट पोल की पहली बार शुरुआत समाजशास्त्री और पूर्व नेता मार्सेल वॉन डैम ने की थी। जो कि नीदरलैंड के रहने वाले थे। 15 फरवरी 1967 को वॉन डैम ने इसका प्रयोग किया। नीदरलैंड में हुए चुनाव में डैम का आकलन बिल्कुल सटीक बैठा था। अपने देश भारत में एग्जिट पोल की शुरूआत इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन यानी आईआईपीयू (IIPU) ने की थी। एरिक डी कोस्टा इसके प्रमुख थे। 1996 में एग्जिट पोल चर्चा में अधिक आया। जब दूरदर्शन ने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज को पूरे देश में एग्जिट पोल कराने की अनुमति प्रदान की थी। देश में पहली बार टीवी पर एग्जिट पोल का प्रसारण 1998 में किया गया था।

