हरिद्वार। कहां से आये ये तो पता नहीं, कहां चले गये यह भी मालूम नही, कहां से चले गये यह जानकारी नहीं है फिर भी दावा कि 30 लाख से ज्यादा लोग कुुंभ मेले में सोमवार को हुए सोमवती अमावस्या स्नान पर हरिद्वार आये थे। अब हैरत इस बात की है की जब रविवार को हरिद्वार के होटल-धर्मशालाएं खाली थे और सिर्फ सोमवार को 30 लाख लोगों का एकदम से आना संभव नहीं है तो आखिर सरकारी दावों के अनुसार 31 लाख 23 हजार हरिद्वार और उसके आस-पास स्नान करने के लिये आये कहां से। वहीं उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत का दावा है कि कुंभ मेले में कोविड नियमों का पूर्णतया पालन कराया गया। लेकिन क्या 30 लाख लोगों की रिपोर्ट को देखना, कोरोना जांच करना आदि संभव है। और क्या यह भी संभव है कि हरिद्वार में आये 30 लाख लोगों में से संक्रमित प्रशासन को नहीं मिले हों।
हरिद्वार में महाकुंभ में सोमवार को हुए सोमवती अमावस्या के स्नान को लेकर सरकार और मेला प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। प्रशासन की मानें तो 30 लाख से ज्यादा लोगों ने सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान किया। लेकिन प्रशासन और सरकार के दावों पर यकीन करना जरा मुश्किल इसलिये है कि रविवार को हरिद्वार के अधिकांश धर्मशालाएं, होटल, सराय और आश्रम लगभग खाली थे। वहीं आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार सोमवार को महज पंद्रह सौ से दो हजार श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। कोविड नेगेटिव रिपोर्ट न लाने वाले यात्रियों से भरी 357 यात्री गाड़ियों को राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया गया। 6538 गाड़ियों ने 30 हजार से अधिक यात्रियों के साथ हरिद्वार में प्रवेश किया। सोमवार को देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से आयीं 17 ट्रेनों से तकरीबन आठ हजार और बसों से 1500 यात्री हरिद्वार पहुंचे थे।
यह सब मिलाकर भी यात्रियों की संख्या एक लाख से कम ही बैठती है। तो सवाल यह है कि बाकी के 29 लाख लोग कहां से और कैसे हरिद्वार तक पहुंचे और यहां से वापस कैसे गये। और यदि प्रशासन के दावों पर यकीन करें तो सीएम रावत के इस दावे पर यकीन करना मुश्किल है कि सोमवती अमावस्या स्नान पर कोविड नियमों का शत-प्रतिशत पालन कराया गया है।
हालांकि आईजी संजय गुंज्याल का कहना है कि उन्होंने सोमवती अमावस्या स्नान पर एक करोड़ 80 लाख यात्रियों के आने की उम्मीद करते हुए उसी के मुताबिक व्यवस्था की थी। लेकिन आशा से कम संख्या में श्रद्धालुओं के आने सेे लग रहा है कि यात्री कम आयेे हैं। उनका दावा है कि लोगों ने हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश तक स्नान किया है और कुल आंकड़ा 30 लाख से ज्यादा हो गया है। हालांकि लोगों का कहना है कि कुंभ मेले में आने वाले अधिकतम लोग हरिद्वार में ही स्नान करते हैं। अन्य स्थानों पर स्नान करने वालों की संख्या बेहद कम होती है।

