Bhimrao Ambedkar Airstrip: मेरठ। मेरठ का भीमराव अंबेडकर हवाई पटटी। परतापुर स्थित ये हवाई पटटी करीब तीस साल पुरानी है। केंद्र और प्रदेश सरकारों के मंत्रियों के विमान इसी हवाई पटटी पर उतरते हैं। मंत्री और जिम्मेदार आते हैं और इसी हवाई पटटी से उड़ान भरकर निकल जाते हैं। लेकिन किसी ने इसके लिए गौर नहीं किया। गुरुवार को यूपी सरकार ने बजट पेश किया। लेकिन इस बजट में हवाई उड़ान के दावे तो किए। लेकिन यह हकीकत में कब बदलेगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। लंबे समय परतापुर की ये हवाई पट्टी अपने विकास का सपना देख रही है। पश्चिमी उप्र ही नहीं उत्तरी भारत का व्यापारिक हब कहा जाने वाला मेरठ आज एक एयरपोर्ट के लिए तरस रहा है। यहां के लोगों को देश के दूसरे राज्यों के लिए दिल्ली जाना पड़ता है प्लेन पकड़ने के लिए। जबकि आने जाने में करीब 6 घंटे का समय नष्ट होता है।
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मेरठ का ये हाल तब है जबकि यहां पर भाजपा की भारी भरकम फौज हैं। इसी मेरठ से कई बार देश और प्रदेश की दिशा तय हुई है। मेरठ मे चार विधायक,तीन सांसद के अलावा भाजपा का पश्चिमी उप्र का कार्यालय है। इतना ही नहीं यह आरएसएस का भी बड़ा गढ़ है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भी मेरठ का देश में ही विदेश में भी बड़ा नाम है। 1992 में यानी 30 साल पहले मेरठ में हवाई पट्टी की नींव रखी थी। यह मेरठ जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर परतापुर के गगोल में है। दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेस वे से इसकी दूरी दो किमी है।
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प्रदेश के अलावा केंद्र सरकार मेरठ में एयरपोर्ट बनाने को लेकर बड़े दावे करती रहीं हैं। लेकिन 30 साल पहले बनी हवाई पट्टी आज भी वहीं है। 2012 में जब रालोद मुखिया देश के नागरिक उड्यन मंत्री बने तो उन्होंने मेरठ में हवाई अड्डा बनाने की घोषणा की थी। उसके बाद 2014 से केंद्र में भाजपा की सरकार है। केंद्र में भाजपा की सरकार को अब आठ साल हो गए वहीं उप्र में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में भी मेरठ की हवाई पटटी को हवाई वादों के अलावा कुछ नहीं मिला।
