अमेरिका में शिकागो है। यहां रहने वाले पॉल और शेल्बो को बचपन से कहानियां सुनने का शौक था। पॉल बताते हैं कि मेरे माता-पिता अयोध्या के बारे में कहानियां सुनाते रहते थे।
उनसे रामनगरी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में काफी कुछ सुना था। उन्हीं बातों से मेरे मन में अयोध्या को देखने की इच्छा हुई।
पॉल के साथ आईं शेल्बे कहती हैं कि मेरे दोस्तों ने अयोध्या की खूब तारीफ की थी। रामनगरी के पुराने इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे बताया। इसके बाद मेरी भी रामलला के दर्शन करने की इच्छा होने लगी।
मैंने सोचा कि दीपोत्सव से अच्छा कोई और मौका नहीं हो सकता। इसीलिए यहां दीपदान करने आ गई। मुझे यहां तक लाने में मेरे दोस्त पॉल ने मदद की। वह भी मेरे साथ अयोध्या आया है।
दरअसल, शिकागो से अयोध्या आने वाले पॉल और शेल्बे के लिए इस बार दीपोत्सव यादगार बन गया। दोनों ने सरयू आरती में हिस्सा लिया और राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाए।
दोनों बताते हैं कि हमारे लिए सबसे खास सरयू आरती रही। आरती में शामिल होने के बाद राम की पैड़ी पहुंचे और लोगों के साथ दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया।
पॉल और शेल्बे ने बताया कि भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति से जुड़े इस उत्सव को देखने की उत्सुकता भी उन्हें यहां खींच लाई।
मलेशिया से अयोध्या पहुंचे शेन, कहा- रामनगरी अद्भुत है
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले शेन भारत की यात्रा पर हैं। अयोध्या पहुंचने से पहले वह मलेशिया में थे। वहां भारतीय समुदाय के बीच दिवाली की तैयारियां देखकर उन्हें रामनगरी के दीपोत्सव के बारे में पता चला।
शेन बताते हैं कि रामनगरी पहुंचकर बहुत अच्छा लगा। मेरे लिए दीपोत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा को करीब से जानने का मौका है।
शेन ने कहा कि यहां अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं को एक साथ देखना अच्छा अनुभव है। उन्होंने अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था की भी सराहना की। शेन सोमवार तक अयोध्या में रहेंगे। इसके बाद वह वाराणसी जाएंगे।
