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फटी जींस पहनने वाली समाजसेविका समाज को क्या संदेश देगी


फटी जींस पहनने वाली समाजसेविका समाज को क्या संदेश देगी

हरिद्वार। औरतों को फटी हुई जीन्स में देखकर हैरानी होती है। मन में ये सवाल उठता है कि इससे समाज में क्या संदेश जाएगा। हरिद्वार में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि हवाई जहाज से जयपुर यात्रा के दौरान मेरे बगल वाली सीट पर एक बहनजी बैठी थी। गम बूट पहनी महिला की जींस घुटने से फटी हुई थी। महिला ने खुद को एनजीओ संचालक बताया। तीरथ सिंह रावत ने कहा, मैंने सोचा जो महिला खुद एनजीओ चलाती हो और फटी हुई जींस पहनी हो, वह समाज में क्या संस्कृति फैलाती होगी। महिलाओं को लेेकर विवादित बयान देने वाले उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रोल हो रहे हैं।

उत्तराखंड में भाजपा की छवि सुधारने के लिये पूर्व सीएम त्रिवेंद सिंह रावत से इस्तीफा दिलवा कर तीरथ सिंह रावत को प्रदेश का मुख्यमंत्ररी बनाया गया था। मगर पद संभालते ही पूर्व सीएम के फैसलों को बदलने से चर्चाओं में आये सीएम रावत अब युवाओं के फैशन पर टिप्पणी कर मुश्किलों में आ गये हैं। सीएम फटी जींस और समाज सेविकाओं पर दिए गए बयान के कारण सोशल मीडिया में ट्रोल हो रहे हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत मंगलवार को बाल अधिकार सरंक्षण आयोग द्वारा बच्चों में बढ़ती नशे की लत, रोकथाम और पुनर्वास विषय पर आयोजित सम्मेलन में पहुंचे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम रावत ने कहा कि बच्चा घर से संस्कार सिखता है और जो देखता है वही करता है। भौतिकवाद की चकाचैंध के पीछे आज यहां का नौजवान और नौजवान ही नहीं युवतियां भी भाग रही हैं। पहली पसंद होती है फटी हुई जींस। सीएम तीरथ सिंह रावत का कहना है कि जिसने फटी हुई जींस पहनी वो बड़े बाप का बेटा हो गया। पिता जी भी पहले पापा अब डैड हो गए।

युवाओं के पाश्चात्य संस्कृति अपनाने पर टिप्पणी करने के साथ फटी जींस पहनी समाज सेविका का जिक्र कर सीएम तीरथ सिंह रावत मुश्किलों में आ गये हैं। सीएम रावत का यह बयान लोगों को पसंद नहीं आया और सोशल मीडिया पर सीएम तीरथ सिंह रावत सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रोल हो रहे हैं। सीएम तीरथ सिंह रावत के बयानों को लेकर लोगोें का कहना है कि एक युुग में इंसान पत्तों से बदन ढकता था तो क्या अब कपड़े पहनना भी गलत हो गया है। कपड़ें पहनना इंसान की व्यक्तिगत पसंद है और आप अपने विचारों को जबरन किसी पर थोप नहीं सकते।

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