गूगल पर सुसाइड या आत्महत्या टाइप करते ही क्या होता है?

लाइफस्टाइलगूगल पर सुसाइड या आत्महत्या टाइप करते ही क्या होता है?

Date:


गूगल पर सुसाइड या आत्महत्या टाइप करते ही क्या होता है?

  • कोरोना के बाद से मानसिक घबराहट के केसों में 25 परसेंट तक बढ़ोतरी दर्ज की गई
  • 2018 में आईकॉल गूगल और फेसबुक के साथ बतौर मेंटल हेल्थ पार्टनर जुड़ गया

गूगल पर आत्महत्या टाइप करते हैं तो आपकी स्क्रीन पर फोन नंबर 9152987821 चमकता है और साथ में लिखा आता है, ‘मदद मिल सकती है, आज ही किसी काउंसलर से बात करें.’ये नंबर मुम्बई के एनजीओ आईकॉल (आई कॉल) के कॉल सेंटर का है. आईकॉल की शुरुआत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के स्कूल ऑफ ह्यूमन इकोलॉजी ने 2012 में की. मकसद था मेंटल हेल्थ की सुविधा को देश के हर नागरिक तक पहुंचाना.

कैसे काम करता है आई कॉल?
दो साल पहले यानी 2018 में आईकॉल गूगल और फेसबुक के साथ बतौर मेंटल हेल्थ पार्टनर जुड़ गया.आईकॉल के साथ 25 प्रोफेशनल मेंटल हेल्थ काउंसलर अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं. सुबह आठ बजे से लेकर रात के दस बजे तक हिंदी और अंग्रेजी सहित कई स्थानीय भाषाओं में काउंसलिंग देते हैं. प्रेरणा यादव आईकॉल के साथ बतौर प्रोग्राम कॉर्डिनेटर जुड़ी हैं. फोन पर बात करते हुए वे बताती हैं, ‘हमारी हेल्पलाइन पैन इंडिया है.हमारे सभी काउंसलर हिंदी और अंग्रेजी में तो बात कर ही पाते हैं. साथ ही हम मराठी, पंजाबी, मलयालम, बांग्ला और कन्नड़ जैसी स्थानीय भाषाओं में भी काम करते हैं.

मार्च तक कॉल सेंटर में डेली 150 कॉल तक आ जाते
इस साल मार्च तक कॉल सेंटर में हर दिन 100 से 150 कॉल आ जाते थे. प्रेरणा यादव कहती हैं, ‘मेरे पास ठीक-ठीक नंबर तो नहीं हैं लेकिन इतना दावे के साथ कह सकती हूं की लॉकडाउन के बाद से ज्यादा फोन आ रहे हैं. इसी को देखते हुए हमने अप्रैल में दो और टेलीफोन लाइनें शुरू कीं. एक उनके लिए जो कोरोना से लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं.जैसे- हमारे डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी और पुलिसकर्मी. दूसरी उनके लिए जो कोरोना या लॉकडाउन की वजह से परेशान हैं या डिप्रेस्ड महसूस कर रहे हैं.’

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related