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लॉकडाउन में आपने क्या सीखा ?


लॉकडाउन में आपने क्या सीखा ?

विश्‍वास कपूर  

विश्‍वास कपूर  

आज से कुछ महीने पहले किसी ने ये कहा होता कि आने वाले समय में सारी दुनिया सारे देश अपना कामकाज बंद कर देंगे और लोगों को घर में दुबक कर बैठना होगा तो इस बात पर हर कोई हंस देता या कहता की चलो मज़ाक बहुत हुआ कुछ काम किया जाए , काम पर वापिस जाया जाये।

पढाई , प्रतिस्पर्धा , पेंडिंग वर्क , डेडलाइन्स के बीच लोगो को सुकून की तलाश तो थी पर ऐसा कुछ होगा ये नहीं पता था। 

आज जब कोरोना महामारी के चलते भारत में lockdown को दो महीने से ज़्यादा हो चले हैं तो चलिए ये भी सोच लेते हैं की आपने हमने इस दौरान किया क्या ? क्या कुछ नया पुराना सीखा समझा , या  देखा ?

सोशल मीडिया के दौर में एक पोस्ट facebook और watsapp पर थी कि ऐसे समय में भी आपने अगर कोई  नया skill नहीं सीखा, किताबें नहीं पढ़ीं , भाषा नहीं सीखी तो आपके पास समय की कमी नहीं है आप में अनुशासन और दृढ़ संकल्प की कमी है। इस बात ने मुझे भी सोच में डाल दिया  कि हम्म कुछ तो करना सीखना चाहिए , पढ़ना चाहिए। 

 इसके विपरीत जल्द ही दूसरी तरह की पोस्ट आने लगी कि कोई प्रतिस्पर्धा थोड़ी है , हम किसी रेस में थोड़ी भाग रहे हैं।  नहीं किया कुछ ख़ास , अनूठा तो भी कोई बात नहीं।  

इन दोनों बातों के बीचों बीच ज़्यादातर लोगों ने अपने घर की और अपने आस पास की सफाई कि , बर्तन साफ़ किये , झाड़ू पोछा लगाया।  इसके अलावा youtube पर ढेरों receipes देख डालीं।  cake , pastries , नयी तरह के drinks बनाए  और सब्ज़ियों को बनाने के नए तरीके सीख लिए। 

मैंने भी किताबों की तरफ रुख किया।  कुछ कहानिया पढ़नी शुरू की , फिर मोबाइल पर कोरोना Updates से परेशान होकर Amazon और Netflix जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फिल्में , वीडियोज़  , सीरीज़ देख डालीं।  उनसे भी ऊब गया तो मोबाइल में लूडो और अन्य गेम्स खेलनी शुरू कर दीं।  हफ्ते दो हफ्ते बाद एहसास हुआ की मैं दिन में 7 -8 घंटे मोबाइल पर ही हूँ। 

इसी बीच और इसके साथ साथ कुछ और भी चल रहा था. अब घर से बाहर की सड़क पर ट्रैफिक का शोर बिलकुल नहीं था। घर की खिड़की से पेड़ पत्ते अब ज़यादा दिखने लगे थे और पंछियों का शोर अब जैसे फिर से जाग उठा था। इन सब का मिला जुला असर ऐसा हुआ की घर बैठे बैठे कहीं से स्कूल के टाइम की गर्मी की छुट्टियों की याद आने लगी। इन्हीं यादों में शामिल था क्रिकेट खेलना , कहीं घूमने जाना और Walkman पर गाने सुनना।  तो मैंने ढूंढना शुरू किया पुराना Walkman. 

घर में जब मुझे किसी ने टोका की फ़ोन में हज़ारों लाखों गाने सुने जा सकते है तो Walkman ही क्यों ? क्यों ? शायद ये पुरानी यादों में खो जाने का तरीका था . आखिरकार Walkman मिला उसमें सेल डाले गए पर वो चला बिलकुल नहीं. 

कुल मिलाकर अब मैं दो आधी किताबें पढ़ चुका हूँ. कुछ पूरी और कुछ अधूरी web series देख चुका हूं , वीडियो गेम्स खेलीं , म्यूजिक सुना और भूले भटके मैडिटेशन करने की भी कोशिश की .

तो ऐसा रहा मेरा lockdown में कुछ नया कुछ पुराना करने का सफ़र . अब भी कोई नहीं जानता की सब कैसे सामान्य होगा . ट्रैफिक, काम की मारामारी , स्कूल, कॉलेज , restaurant , सिनेमा , airlines और रेलवे पहले की तरह खुलेंगे या अलग रंग ढंग में. 

आप भी सोचिए , बताईये कैसा रहा आप का lockdown . क्या कुछ नया पुराना सीखा , देखा या अनुभव किया ?  बस ये याद रखियेगा  की किसी से कोई प्रतिस्पर्धा  नहीं है। कोई एक या एक से ज़्यादा पल अगर आपको कुछ बता गए हैं ,  कुछ सिखा गए है तो आप सही दिशा में हैं।  

हाँ lockdown 5 या फिर कहें कि unlock 1 मुबारक हो। 

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