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तीन बड़े खिलाड़ियों के इस फैसले के पीछे क्या “गंभीर” हैं वजह?

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अमित बिश्नोई
किसने सोचा था कि टीम इंडिया के 17 साल बाद एक बार टी 20 वर्ल्ड कप चैंपियन के जश्न की शुरुआत भी ढंग से नहीं हुई होगी और टीम के दो सबसे मज़बूत स्तम्भ कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली इस फॉर्मेट को अलविदा कहकर क्रिकेट प्रेमियों को ज़बरदस्त झटका देंगे और फिर इनमें रविंद्र जडेजा भी शामिल हो जायेंगे। यानि चैंपियन 11 खिलाडियों में तीन का एक साथ टी 20 फॉर्मेट छोड़ना भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक सदमे जैसी खबर. इसी के साथ ही एक कोच के रूप राहुल द्रविड़ का भी संन्यास। हालाँकि राहुल द्रविड़ ने तो इसका एलान पहले ही कर दिया था लेकिन, एकसाथ चार लोगों का जाना बहुत बड़ा झटका है. वैसे तो हर बड़ा खिलाड़ी अपने चरम पर खेल से संन्यास लेना अच्छा समझता है लेकिन जहाँ तक भारतीय क्रिकेट का सवाल है यहाँ पर ये प्रथा नहीं है , गिनती के ही कुछ लोग होंगे जिन्होंने अपने चरम पर खेल को अलविदा कहा होगा, वरना यहाँ पर तो सन्यास लिया नहीं जाता दिलाया जाता है. ऐसे में कहीं न कहीं एक सवाल तो पैदा ही होता है कि एकसाथ तीन बड़े खिलाड़ियों ने टी 20 फॉर्मेट क्यों छोड़ दिया। क्या ये वाकई उनके अंतरात्मा की आवाज़ थी या फिर उन्होंने आगे के बारे कुछ सोचकर ये फैसला लिया।

आप ये तो नहीं कह सकते कि इन तीनों खिलाडियों में क्रिकेट के प्रति अब जूनून नहीं दिख रहा, या कम हो गया, या फिर वो टीम पर बोझ बने हुए हैं. शायद कोई भी इन तीनों ग्रेट खिलाडियों के बारे में ऐसा सोच नहीं सकता। बकौल पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर रोहित शर्मा और विराट में अभी बहुत क्रिकेट बची हुई है जिसका इस्तेमाल टीम इंडिया के लिए होना चाहिए, कहने का मतलब ये कि वेंगी नहीं चाहते हैं कि ये खिलाड़ी अभी इस फॉर्मेट से रिटायरमेंट लें। ये भी कहा जा रहा है कि रोहित और विराट को टीम के सहयोगियों ने बहुत मनाने की कोशिश की लेकिन दोनों नहीं माने और अपने मन की बात मीडिया को बता दी. बता दें कि इसी दौरान वेस्टइंडीज में ही BCCI जय शाह का एक खुलासा भी आ गया कि टीम इंडिया के नए कोच पर फैसला हो चूका है, बस एलान बाकी है. जय शाह ने बताया कि हेड कोच के लिए दो लोगों का इंटरव्यू लिया गया था जिसमें से एक का नाम फाइनल हो गया है और इसका एलान टीम के भारत पहुँचने पर हो जायेगा जो श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया के साथ होगा।

हेड कोच के लिए दो नामों में एक नाम केकेआर के मेंटोर रहे पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर का है, दूसरे का नाम अभी गुप्त है, घरेलू है या विदेशी अभी कुछ नहीं पता लेकिन स्पोर्ट्स मीडिया की अगर माने तो टीम इंडिया के अगले हेड कोच गौतम गंभीर होंगे ये बात तय हो चुकी है, भले ही नए कोच के नाम का एलान अभी आधिकारिक तौर पर न हुआ हो लेकिन टीम के खिलाडियों को उसका नाम न मालूम हो ऐसा हो नहीं सकता। कम से कम टीम के कप्तान और सीनियर खिलाडियों को हर हाल में मालूम होता है कि टीम मैनेजमेंट में क्या बदलाव हो रहा है, कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, ऐसे में रोहित, विराट और जडेजा को भी मालूम ही होगा कि सौम्य सुशील राहुल द्रविड़ की जगह कौन ले रहा है. नया आने वाला कोच किस तरह का, उसका स्वभाव कैसा है, अपने ज़माने में मैदान पर उसका बर्ताव कैसा रहा, साथी खिलाडियों के साथ उनका बर्ताव कैसा रहा था. टीम के खिलाडियों को समझने की उसमें कितना समझ है, वो कितना सहयोगी है या फिर कितना अड़ियल है. नए आने वाले कोच के बारे में टीम की टॉप लेयर को ज़रूर पता होता है.

अब अगर जैसा कि मीडिया में आम राय है कि गौतम गंभीर ही अगले कोच होंगे तो फिर रोहित, विराट और जडेजा के एकसाथ टी 20 फॉर्मेट छोड़ने का कुछ न कुछ सम्बन्ध नज़र आता है। हम अगर पिछले दिनों में जाकर देखें तो पाएंगे कि गौतम गंभीर अपने नाम के अनुरूप गंभीर हैं और उनकी ये गंभीरता उन्हें कहीं न कहीं थोड़ा घमंडी, थोड़ा attitude वाला बनाती है, जिसके मैदान पर और मैदान के बाहर कई झगडे हो चुके हैं, विराट कोहली के साथ तो कहा जाता है कि उनका छत्तीस का आंकड़ा है, रोहित शर्मा और रविंद्र जडेजा को भी कभी गौतम के बारे में कोई गंभीर बात करते हुए नहीं सुना गया. गंभीर का टीम इंडिया के कोच के लिए जबसे नाम चला है इनमें से किसी का भी इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है. गंभीर जब बतौर खिलाड़ी थे तब भी अलग थलग से थे और बाद में भी उनके नेचर में कोई बदलाव नहीं देखा गया. उनके पास कोचिंग का कोई तजुर्बा नहीं है. वो बतौर मेंटोर पहले लखनऊ सुपर जायंट्स और फिर बाद में KKR से जुड़े। संयोग से उन्हें कोचिंग का तजुर्बा न होते हुए भी आंकड़े उनके पक्ष में हैं. उनके मेंटोर रहते LSG अपने पहले ही प्रयास में फाइनल खेली, दुसरे साल सेमी फ़ाइनल तक गयी, इसके बाद गौतम गंभीर केकेआर से जुड़ गए और KKR चैंपियन बन गयी लेकिन यहाँ पर देखने वाली बात है कि LSG के लिए गौतम गंभीर के लिए दोनों सीजन अच्छे गए फिर भी LSG ने गौतम गंभीर को रोकने की कोशिश नहीं की. KKR को चैंपियन बनाने में उनके हेड कोच चंद्रकांत पंडित और बैटिंग कोच अभिषेक नायर ने बड़ी मेहनत की लेकिन जीत का क्रेडिट गौतम गंभीर ले गए. फाइनल वाले दिन केकेआर के कई खिलाडियों ने गौतम गंभीर से ज़्यादा अभिषेक नायर की शान में कसीदे पढ़े लेकिन लाइमलाइट में गौती रहे और इसी लाइमलाइट वजह से उन्हें टीम इंडिया के हेड कोच तक पहुँचाने की खबर चल रही है.

कहने वाले कह रहे हैं कि रोहित और विराट को अच्छी तरह मालूम है कि गौतम गंभीर अगर बतौर हेड कोच आते हैं तो अपने स्वाभाव के मुताबिक वो टीम में अपनी ही चलाएंगे। जैसा कि खबर भी है कि कोच बनने के लिए गंभीर ने कुछ शर्तें भी बोर्ड के सामने रखी थीं जिनमें से एक शर्त ये भी थी कि टीम के फैसले उनके हिसाब से लिए जाएंगे, ये भी कहा जा रहा है कि बोर्ड ने उनकी शर्तें मान भी ली हैं ऐसे में इस बात की भी सम्भावना है कि टीम से कुछ खिलाडियों को बाहर भी जाना पड़ सकता था, तो क्या रोहित, विराट और जडेजा के एकसाथ टी 20 क्रिकेट से दूर होने के पीछे ये एक वजह हो सकती है. गंभीर नए खिलाडियों की बहुत वकालत करते हैं, हालाँकि इन टीमों को क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट से हटाना गंभीर ही क्या किसी के लिए भी मुश्किल होता लेकिन हो सकता है कि इन तीनों ने सोचा हो कि बेवजह की टेंशन लेने से क्या फायदा, चैंपियन के रूप में खेल से अलग हो, इससे बेहतर और कुछ नहीं. वैसे गौतम गंभीर अगर टीम इंडिया के कोच बनते हैं तो उनके स्वाभाव को देखते हुए बोर्ड का ये एक गलत फैसला होगा, गौतम गंभीर सिर्फ एक बड़ा नाम हैं लेकिन राहुल द्रविड़ की तरह बड़े नहीं हैं, जो न सिर्फ खेल में बड़े थे बल्कि सोच में बड़े हैं और खिलाडियों के बीच उनका बहुत सम्मान है जो शायद गौतम गंभीर कभी हासिल नहीं कर सकते क्योंकि वो कर ही नहीं सकते।

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