वे टैक्सपेयर्स जिनकी टैक्स की देनदारी शून्य होती हैं, उनकी ओर से फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न को NIL ITR कहा जाता है।
जब भी किसी टैक्सपेयर की आय इनकम टैक्स की छूट की सीमा से कम होती है तो उन पर टैक्स शून्य बनता है।
NIT ITR फाइल करने के फायदे
इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल बनती है।
अगर आप विदेश जाने की योजना बना रहे हैं तो अपना आईटीआर भरना शुरू कर दें।
फॉर्म 15जी/एच जमा करने से वित्तीय संस्थानों द्वारा टीडीएस कटौती को रोका जा सकेगा।