जब मशीन किसी इंसानी काम को इंसानो की तरह सोच-समझ कर करने लगे तो वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहलाती है।
साल 1950 में किसी मशीन को इसी परिभाषा के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस माना जाता था।
समय के साथ एडवांस होती टेक्नोलॉजी के साथ मशीन को लेकर इस परिभाषा में भी कई बदलाव हुए हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब किसी परेशानी का समाधान खोजने, नए प्लान को लाने के साथ नए आइडिया को जेनेरेट करने और चीजों में सुधार किया जा सके यह इंटेलिजेंस कहलाती।
एक समय तक केवल इंसान ही इंटेलिजेंट होने की परिभाषा में फिट बैठते हैं,
लेकिन अब केवल इंसान ही नहीं मशीन भी इंटेलिजेंट कहलाती है, जिसके बाद ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी टर्म सामने आती है।
वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट चैटजीपीटी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जा रहा है।