राजस्थान शौर्य और अपनी लोक संस्कृति के लिए काफी प्रसिद्ध है।
इस रेतीले प्रदेश में मौजूद झीलों की नगरी भी लोगों की खूब लुभाती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं राजस्थान में एक झील ऐसी भी है जिसके इतिहास की जड़ें बहुत गहरी है।
कहा जाता है कि राजस्थान की सांभर झील का असुरों के गुरु शुक्राचार्य से है।
महाभारत के अनुसार वर्षों पहले सांभर झील वाला क्षेत्र असुर राज वृषपर्वा के साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था और यहां असुरों के कुलगुरु शुक्राचार्य रहते थे।
इसी जगह पर शुक्राचार्य की बेटी देवयानी का विवाह ययाति नरेश के साथ हुआ था।
झील के पास में आज भी एक मंदिर है जो कि शुक्राचार्य की सुपुत्री देवयानी को समर्पित है।
जनश्रुतियों के अनुसार एक प्रचलित कथा ऐसी भी है कि चौहान राजपूतों की रक्षक शाकम्भरी देवी ने यहां के एक जंगल को चांदी के मैदान में बदल दिया था।
जिसको लेकर लोग खूब झगड़ने लगे जिस वजह से यह झील मानवता के लिए अभिशाप साबित होने लगी।
आगे चलकर लोगों ने देवी से अपना वरदान वापस लेने का जब आग्रह किया तो देवी ने सारी चांदी को नमक में बदल दिया।
यहां शाकंभरी देवी का एक मंदिर भी है।
सांभर झील जाना बहुत आसान है। यह जयपुर से करीब 80 किमी दूर है। जयपुर पहुंचने के बाद आराम से बस से यहां जाया सकती है।
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