भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में एक होली इस साल 7 और 8 मार्च को मनाई जाएगी।
पहली छोटी होली, जिस दिन सुबह को सभी औरतें होलिका माता की पूजा करती है और शाम को होलिका दहन की जाता है
दूसरी बड़ी होली, जिस दिन को रंग का दिन भी कहते हैं इस दिन सभी लोग अपने प्रियजनों को गुलाल लगते है।
बता दें कि भारत के विभिन्न राज्यों में अलग- अलग प्रकार से होली का जश्न मनाया जाता है। चलिए जानते है।
मथुरा, वृंदावन में होली का अपना एक अलग ही अंदाज है यहां पर होली से कई दिन पहले ही होली का कार्यक्रम शुरू कर दिए जाते हैं। इसके अलावा, यहां की लठ मार होली भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
मध्य प्रदेश में होली के बजाए रंग पंचमी का अत्यधिक महत्व है। दरअसल, रंग पंचमी होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है लोग गुलाल व पानी में घुले रंगों के साथ खेलते हैं। इंदौर में रंग पंचमी एक अलग ही प्रकार के हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।
ऱाजस्थान में होली तीन प्रकार की होती है। माली होली- इसमें आदमी औरतों पर पानी डालते है और बदले में औरतें आदमीयों की लाठियों से पिटाई करती है। गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली भी बेहद ख़ूबसूरत होती है।
बिहार में, मुख्य त्योहार होली से एक दिन पहले, लोग होलिका की कथा के सम्मान में अलाव जलाते हैं। होली से पहले के दिन को फाल्गुन पूर्णिमा कहा जाता है। अगले दिन गीली होली सुबह/दोपहर में खेली जाती है जिसके बाद होली मिलन किया जाता है।
कर्नाटक में भी होली दो दिन के लिए मनाई जाती है, त्योहार से पहले लोग लकड़ी इकट्ठा करते हैं और 'कामदहन' की रात को जलाते हैं। सिरसी नामक राज्य के एक हिस्से में, लोग त्योहार के दिन से पांच दिन पहले 'बेदरा वेशा' नामक एक लोक नृत्य करते हैं।
महाराष्ट्र में होली का उत्सव लगभग एक सप्ताह तक चलता है। जिसमें में युवाओं द्वारा जलाऊ लकड़ी एकत्र की जाती है और फिर हर मोहल्ले में 'शिमगा' की रात को प्रज्वलित किया जाता है।
यहां होली के त्योहार को कमुनि पुन्नमी/काम पूर्णिमा या जजिरी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह कामदेव की कथा से जुड़ा है। तेलंगाना में होली का उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें की आखिरी दिन मुख्य त्योहार होली मनाई जाती है।
पश्चिम बंगाल में, होली के त्योहार को 'डोल जात्रा' या 'डोल पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है और लोगों द्वारा पालकी पर राधा और कृष्ण की प्रतिमा रखकर मनाया जाता है।