IMF ने अभी दो दिन पहले कहा था कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है, देश की सत्तारूढ़ सरकार भी विकास की नयी नयी कहानियां दुनिया को सुनाती है, विश्वगुरु बनने के हसीं सपने भी दिखाई देते हैं मगर जब वर्ल्ड हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट आती है तो यह सारे हसीन सपने बिखरते नज़र आते हैं, IMF की बातें एक छलावा लगने लगती हैं. जी हाँ बुरी खबर यह है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की जो नयी रिपोर्ट आयी है उसमें भारत की स्थिति और बुरी हुई है, भारत 101 से 107वे स्थान पर पहुँच गया है.
अगर हम 2020 की बात करें तो भारत की पोजीशन 94 वे स्थान पर थी, जो 2021 में गिरकर 101वे स्थान पर पहुँच गयी और अब 121 देशों के बीच भारत का नंबर 107वां है यानि भारत से बदतर हालत में सिर्फ 14 देश बचे हैं. भारत से बेहतर हालात में तो उसके कई पड़ोसी मुल्क हैं यहाँ तक कि बदहाल पाकिस्तान भी भारत से बेहतर पोजीशन में है. अगर हम साऊथ एशिया के देशों की बात करें तो भारत से बदतर हालत में सिर्फ अफ़ग़ानिस्तान ही है. बता दें कि हंगर इंडेक्स की यह रैंकिंग जीएचआई स्कोर के आधार पर जारी की जाती है, वर्तमान में भारत का स्कोर 29.1 है. GHI स्कोर की गणना चार indicators पर की जाती है, इन संकेतकों में कुपोषण, अल्पपोषण, बाल मृत्यु दर और बच्चों की वृद्धि दर. 2012 और 2021 के बीच भारत का GHI स्कोर 28.8 27.5 के बीच रहा.
अगर आंकड़ों को हम देखें तो भारत में लगभग 20 मिलियन लोग ऐसे हैं जिन्हें रोज़ दो वक्त का खाना नहीं मिल पाता और रात को उन्हें भूखे ही सोना पड़ता है. 2020 में अगर साउथ एशिया की अगर हम बात करें तो 1331.5 मिलियन लोग ऐसे थे जिन्हें पौष्टिक आहार नहीं मिल पाया और उसमें से 973.3 मिलियन तो अकेले भारत के लोग थे. भूख से होने वाली मौतों का आंकड़ा देखने पर पता चलता है कि भारत में हर साल 7 से 19 हजार लोगों की भूख से मौत हो रही है. भारत में कुपोषण की समस्या बड़ी विकराल है, इंडिया फूड बैंकिंग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 189.2 मिलियन लोग कुपोषित हैं यानि 14% जनसंख्या कुपोषित है.
