Varanasi Serial Blast : फांसी की सजा सुनते ही वलीउल्लाह परिवार का हवाला देकर मांगने लगा रहम की भीख

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गाजियाबाद। वाराणसी सीरियल ब्लास्ट मामले के आरोपी वली उल्लाह को दोषी करार देते हुए आज गाजियाबाद की सेशन कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। जज ने जैसे ही फांसी की सजा सुनाई सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी वलीउल्लाह का चेहरा गर्मी से बिल्कुल सफेद हो गया। वलीउल्लाह ने सजा मिलने के बाद अपनी बूढ़ी मां, पत्नी और बच्चों का हवाला देते हुए रहम की भीख मांगी। जिसे जज ने अनसुना कर दिया। जिस समय जज आरोपी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुना रहे थे उस दौरान कोर्ट परिसर में खामोशी छाई हुई थी।

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गाजियाबाद सेशन कोर्ट में आज संकट मोचन मंदिर और दशाश्वमेध घाट पर बम बरामद होने यानी दो मामलों में दोषी ठहराया गया। जबकि कैंट रेलवे स्टेशन पर बम धमाके में साक्ष्य अभाव में उसको बरी कर दिया। इस तरह एक मामले में दोषी वलीउल्लाह को आजीवन कारावास तो वहीं दूसरे मामले में उसको फांसी की सजा सुनाई गई। इतना ही नहीं उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन, दशाश्वमेध घाट के अलावा संकट मोचन मंदिर पर वर्ष 2006 की 7 मार्च को सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस मामले में वली उल्लाह सहित जकारिया, मोहम्मद जुबैर,मुस्तकीम और वशीर के नाम सामने आए थे। इनमें से मोहम्मद जुबैर कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान मारा गया। जबकि बांग्लादेश निवासी मुस्तकीम, जकारिया और वशीर देश छोड़कर चले गए। पुलिस ने घटना के करीब एक माह बाद यानी 5 अप्रैल 2006 को प्रयागराज निवासी फूलपुर के वलीउल्लाह को गिरफ्तार कर लिया था।

आरोपी वली उल्लाह का मुकदमा लड़ने के लिए कोई वकील नहीं मिला। उसके बाद हाईकोर्ट ने यह मामला गाजियाबाद ट्रासफर कर दिया था। उसके बाद से ही इस मामले की सुनवाई गाजियाबाद में हो रही थी। वलीउल्लाह गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है। 16 साल की सुनवाई में 121 गवाह मामले में पेश हुए। तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर गत 5 जून को जिला जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने वालीउल्लाह को संकट मोचन मंदिर में विस्फोट और दशाश्वमेध घाट पर बम बरामद मामले में दोषी पाया था।

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आज जैसे ही कोर्ट ने सजा सुनाई तो वलीउल्लाह जज के सामने गिड़गिड़ाने लगा। उसने कहा कि उसके घर में 80 साल की बूढ़ी मां और पत्नी के अलावा बेटा और बेटी हैं। आर्थिक हालत बहुत खराब है। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। उसने कहा जेल में उसका आचरण सही रहा है। इसलिए कम से कम सजा दी जाए।

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