व्यतिपात योग एक ऐसी महिमा है कि इस योग के दौरान जो भी जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की विशेष कृपा होती है। इस योग में भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है। जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ किया जाता है उसका लाख गुना फल मिलता है। आज 18 सितम्बर 2022 रविवार को सुबह 06ः35 से 19 सितम्बर, सोमवार को सुबह 07ः29 तक व्यतीपात योग है।
व्यतिपात योग के बारे में बताया जाता है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की नजर गलत थी। जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए और नाराज भी हुए। उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया लेकिन चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। इससे सूर्य देव को काफी दुःख हुआ कि इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया। सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरु के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये। इसको इतना नही भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और वो रोने लगे। यही समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।
