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Gyanvapi Masjid controversy : कमीशन की लीक रिपोर्ट का मामला अदालत पहुंचा

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में कल जिला अदालत में हुई सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष की सभी चारों महिला वादियों को कोर्ट ने कमीशन द्वारा मस्जिद परिसर की कराई गयी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की कॉपियां सीलबंद लिफ़ाफ़े में दी गयी थीं और साथ ही यह हिदायत भी दी गयी थी कि सील बंद लिफ़ाफ़े की सामग्री किसी भी तरह से सार्वजानिक न हो लेकिन इसके बावजूद लिफ़ाफ़े मिलने के कुछ ही देर बाद कमीशन की वीडियो के कुछ हिस्से लीक हो गए और एक चैनल विशेष पर प्रसारित भी होने लगे. जिसके बाद सवाल उठने लगे कि यह वीडियो किसने लीक किया।

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वहीँ कमीशन की रिपोर्ट और वीडियो और फोटोग्राफ को सार्वजानिक करने की मांग करने वाले हिन्दू पक्ष की ओर से कहा गया कि यह उनकी तरफ से नहीं किया गया है।  उनके पास अभी भी सील बंद लिफाफा है, उसे जब खोला ही नहीं गया तो लीक करने का सवाल ही नहीं। वहीँ एक चैनल की ओर से दावा  किया गया था कि उनके पास इन वीडियोज़ को खरीदने केलिए 27 मई को ऑफर आया था और वीडियो के बदले तीन लाख रूपये की मांग की गयी थी लेकिन अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए उन्होंने उस ऑफर को ठुकरा दिया था. वहीँ कमीशन के दौरान वीडियोग्राफी करने वाले वीडियोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की यह उसी वीडियो के अंश हैं जो उसने अपने कैमरे में कैद किये थे. 

वहीँ यह मामला आज जिला अदालत पहुँच गया. जानकारी के अनुसार हिन्दू पक्ष की ओर से सभी चारों महिला वादियों ने जिला अदालत जाकर वह सील बंद लिफाफा जज के सामने सरेंडर करने की कोशिश की और इस लीक मामले की जांच करने की मांग भी की. अदालत ने महिला वादियों से लिफाफा लेने से इंकार करते हुए इस मामले पर भी सुनवाई 4 जुलाई को करने की बात कही। वहीँ मुस्लिम पक्ष ने वीडियो लीक होने का मामला जिला जज की अदालत में उठाया है. इस वीडियो में क्या दिखाया गया है बिजनेसबाइट्स से अदालत के आदेश की अवहेलना मानता है इसलिए उसके बारे में कोई जानकारी पाठकों को नहीं दे सकता। 

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बता दें कि इस मामले में विवाद उस समय और बढ़ गया जब कमीशन के दौर मस्जिद परिसर में बने वुजूख़ाने के हौज़ में कठोर रूप से शिवलिंग बरामद हुआ जिसे मुस्लिम पक्ष एक बेकार पड़ा हुआ फव्वारा बता रहा है, वहीँ पक्ष इस कथित शिवलिंग की नियमित पूजा अर्चना की मांग कर रहा है. इस मामले में अब पक्षकार बनने की बाढ़ सी आ गयी है. अदालत में इस दौरान सात आठ  याचिकाएं डाली गयी हैं जिसमें उन्हें हिन्दू पक्ष की ओर से पक्षकार बनाने का अदालत से अनुरोध किया गया है.

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