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Varun Gandhi BJP: वरुण ने कहा, मुफ्तखोर योजनाएं बंद करने की शुरुआत सांसदों से हो

देश में इन दिनों मुफ्तखोर योजनाएं या मुफ्त की रेवड़ियों पर बड़ी चर्चा हो रही है. यह चर्चा अब राजनीतिक रैलियों से होते हुए संसद तक पहुँच गयी है. दरअसल भाजपा को अब मुफ्त की रेवड़ियां बांटने से काफी परेशानी होने लगी है. क्योंकि मुफ्त का माल खाने की आदी होती जा रही देश की जनता अब उधर ही भागती नज़र आती है जिधर से ज़्यादा बड़ा ऑफर आता है. यह मुफ्तखोर योजनाएं अब चुनावों को बुरी तरह प्रभावित करने लगी हैं. यूपी विधानसभा का चुनाव इसकी सबसे जीती जागती मिसाल है जहाँ पर मुफ्त में डबल राशन वितरण से भाजपा के प्रति सारा विरोध हवा हो गया, अखिलेश की सारी मेहनत  पर पानी फिर गया और उनका सत्ता में वापसी का सपना चकनाचूर हो गया. बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मुफ्त में बांटने पर प्रधानमंत्री मोदी के ऐतराज़ के बाद अब भाजपा सांसद सुशील मोदी ने ये मामला राज्यसभा में उठाया है. उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहार देने की प्रथा पर रोक लगाने की बात कहते हुए जीरो ऑवर नोटिस दिया। अब भाजपा सांसद की इसी नोटिस पर एक अन्य भाजपा सांसद वरुण गाँधी ने सवाल दागा है कि क्यों न मुफ्तखोरी बंद करने की शुरुआत सांसदों से की जाय और उन्हें मिलने वाली सभी तरह की मुफ्त सुविधाएँ ख़त्म कर दी जाँय। 

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बता दें कि पीलीभीत से भाजपा सांसद अपनी ही पार्टियों पर जन मुद्दों को लेकर अक्सर ऊँगली उठाते रहते हैं, इस मामले में भी उन्होंने लिखा कि भाजपा  सांसद सुशील मोदी ने मुफ्तखोरी की संस्कृति को खत्म करने पर चर्चा का प्रस्ताव सदन में रखा है, लेकिन जनता का भला करने वाली इन योजनाओं पर उंगली उठाने पहले अपने गिरेबां में जरूर झांक लेना चाहिए. वरुण गाँधी ने कहा कि क्यूं न इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत सांसदों को मिलने वाली पेंशन समेत दूसरी तमाम सुविधाएं खत्म करने से हो?

वरुण गाँधी ने इससे पहले घरेलू गैस कीमतों में इज़ाफ़े और बेरोज़गारी को लेकर सरकार को घेरा था. उन्होंने सवाल किया था कि स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन देने के वादे क्या ऐसे पूरे होंगे? बेरोज़गारी पर उन्होंने लिखा था कि ससंद में सरकार द्वारा बेरोजगारी के आंकड़ों से बाज़ीगरी हो रही है. पिछले 8 वर्षों में 22 करोड़ युवाओं ने केंद्र की नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से सिर्फ 7 लाख लोगों को रोजगार मिल सका है जबकि देश में लगभग एक करोड़ स्वीकृत पद खाली हैं, वरुण ने पूछा कि इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है?

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