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वैलेंटाइन डे हो ‘राष्ट्रीय पर्व’


वैलेंटाइन डे हो ‘राष्ट्रीय पर्व’


भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। हर किसी के जीवन में पहला दुर्भाग्य रहा कि लगभग पूरे वर्ष किसी भी त्योहार को ढंग से नहीं मनाया जा सका।

अब कोरोना क़ाबू में आ चुका है। वैक्सीन लगने का सिलसिला भी तेज़ हो चला है। इस दौरान 14 फरवरी को मोहब्बत का पर्व वेलेंटाइन डे है। इस दिन को आप नफरत के वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान का शुभारंभ मान लीजिए और नए तरीक़े और नई परिभाषा के साथ लव डे मनाइए। सिर्फ कपल्स के बीच ही नहीं, वेलेंटाइन डे को पूरे समाज में मोहब्बत का संचार तेज करने का दिन मानिए।

ये दिन हमारी संस्कृति की गोद में तो नहीं पैदा हुआ है लेकिन हमारी मोहब्बत की संस्कृति की कार्बन कॉपी ही है। मौजूदा समय में हमारी गंगा जमुनी तहज़ीब और एकता की संस्कृति में पैदा होते नफरत के जहर को काटने के लिए मोहब्बत के इस पर्व को हमें पूरी तरह अपना लेना चाहिए है।

पिछले पूरे वर्ष हम जो दर्जनों त्योहार नहीं मना सके उसकी कसर निकालते हुए इजहार-ए-मोहब्बत के इस दिन हर कोई मोहब्बत का इजहार करे । खूब मोहब्बतें लुटाएं और नफरत को शिकस्त दें। बल्कि राष्ट्र वेलेंटाइन डे को ‘राष्ट्रीय पर्व’ ही घोषित कर दे और हम सब सामुहिक रूप से अपने राष्ट्र के प्रति मोहब्बत का इजहार करें। तिरंगे पर गुलाब बरसाएं। अपने देश की शांति-सद्भावना और अखंडता बनाये रखने की कसमें खाएं। प्रत्येक धर्म-जाति, समुदाय, प्रांतों और विभिन्न भाषाओं के लोग प्यार की भाषा के धागे में बांधें । एक दूसरे को गुलाब देकर आपसी प्यार और एकता का इजहार करें। प्रण करें कि माता-पिता से प्यार के रिश्ते का इस दिन एहसास करेंगे। अपने गुरू के प्रति प्यार को याद दिलाएंगे। बहन से टीका करवाएंगे। पड़ोसी या किसी भी प्रतिद्वंद्वी से द्वेष त्यागेंगे। दोस्त की दोस्ती का महत्व समझेंगे।

फरवरी का दूसरा पखवाड़ा बसंत की आमद के साथ शुरू होता है। इस गुलाबी मौसम की आमद बहुत कुछ बताती है और सिखाती भी है। किसी भी सख्त मौसम का अंत नर्म मौसम ही करता है। हर झूठ को सच शिकस्त देता है। असत्य पर सत्य की विजय होती है। हर रात के बाद सुबह होती है। हर अंधेरा उजाले का इतेज़ार करता है। नफरतों के मौसमों के बाद मोहब्बतें के उजाले रौशन होते हैं।

बस इन सच्चाइयों को महसूस कीजिए और विश्वास कीजिए कि नफरत की हर आग को बुझाने के लिए प्यार के समुंदरों की लहरों में सकत पैदा होना हैं। आप ऐसी ही सकत बन जाइए और नफरत के खिलाफ प्यार का माहौल पैदा करने के बहाने ढूंढिए।

वेलेंटाइन को ही एक खूबसूरत बहाना ही मान लीजिए। इस दिन दुश्मन को भी गले लगा लीजिए। दूरियों और फासलों को मिटा दीजिए। विरोधियों की भी प्रशंसा कीजिए। पत्थरों को पिघलने पर मजबूर कर दीजिए।

वेलेंटाइन के पुराने ढर्रे को भूल जाइए। नई कल्पना कीजिए। क्योंकि रस्मे दुनिया भी है मौक़ा भी है, दस्तूर भी है। कपल्स के बीच इज़हार-ए-मोहब्बत को ही इस खास तक सीमित नहीं रखें।

इस मौके का बहुत ज्यादा विस्तार कर दीजिए। लड़के-लड़की का प्रपोज़ करना.. डेट..पार्क..रेस्टोरेंट..गुलाब..चॉकलेट, टैडी बियर, हग डे, किस डे.. प्रॉमिस डे.. इन सब सीमित गतिविधियों से वैलेंटाइन डे को बहुत ऊपर ले जाइए।

इसे इंसान और इंसान के बीच मोहब्बत फैलाने का पर्व ही मानें। जोड़ने और जुड़ने का दिन मानें। करीब आने का मौक़ा मानें। नफरतों को हराने का अवसर मानें।

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