Site icon Buziness Bytes Hindi

Uttarakhand News: भीतरी कलह की भेंट चढ़ी 23 सीटें, भाजपा को देखना पड़ा हार का मुंह


Uttarakhand News: भीतरी कलह की भेंट चढ़ी 23 सीटें, भाजपा को देखना पड़ा हार का मुंह

देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा ने भले ही सरकार बना ली हो। लेकिन भाजपा को इतनी सीटें लाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी और ठंड में पसीना बहाना पड़ा। भाजपा केा उत्तराखंड की जिन 23 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा उनमें अधिकतर सीटों पर पार्टी के भीतर बगावत और भीतरघात ही मुख्य कारण निकलकर आया है। इसके लिए समीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जो कि हर हारी हुई सीट की समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपेगे। समीक्षकों ने अपनी समीक्षा पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट आलाकमान को सौंपनी शुरू की है।

Read also: Shivpal Yadav To Join BJP: पदाधिकारियों-प्रवक्ताओं के साथ शिवपाल यादव ने की बैठक, भाजपा में जाने की चर्चाओं पर साधी चुप्पी

विधानसभा चुनाव में हालांकि भाजपा पूरे बहुमत से सत्ता में आई है। इसके बाद भी जिन सीटों पर पार्टी हारी उन पर हार की वजह जानने को समीक्षकों की तैनाती की गई थी। समीक्षकों ने हारी ​हुई विधानसभा सीटों पर जाकर कार्यकर्ता से बात की और फिर उसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की।

जिसमें से 10 सीटों की रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी है। जबकि अन्य की रिपोर्ट 4 अप्रैल तक आने की उम्मीद है। पार्टी सूत्रों की माने तो कुछ सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा के बजाय प्रत्याशियों के खिलाफ एंटी इंकंबेसी दिखाई दी और भाजपा चुनाव हारी।

Read also: तेजस्वी ने चिराग का बंगला खाली कराने पर कहा, भाजपा ने तो हनुमान के घर में ही आग लगा दी

इन सीटों में हरिद्वार ग्रामीण, यमुनोत्री, नानकमत्ता,किच्छा शामिल हैं। जबकि अन्य हारी हुई सीटें पर संवादहीनता को वजह बताया गया है। सीएम पुष्कर धामी के खटीमा और लक्सर विधानसभा पर भीतरघात के साथ संवादहीनता चुनाव हारने का सबसे बड़ा कारण बना। जबकि मंगलौर, जसपुर, पिरान कलियर,ज्वालापुर,हल्द्वानी और झबरेड़ा में ध्रुवीकरण के चलते पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा।

Exit mobile version