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Igas Festival Uttarakhand: उत्तराखंड में बूढी दिवाली का अवकाश घोषित, दीपावली के 11 वें दिन मनाया जाएगा लोकपर्व इगास

Igas Festival Uttarakhand

देहरादून। उत्तराखंड में बूढ़ी दिवाली यानी प्रदेश के परंपरागत पर्व इगास पर अवकाश घोषित किया है। इसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीटर पर साझा की है। दिवाली के 11वें दिन यानी एकादशी को पूरे उत्तराखंड में इगास यानी बूढ़ी दिवाली पर्व मनाया जाता है। यह दूसरा मौका होगा जब उत्तराखंड में लोकपर्व इगास के दिन अवकाश घोषित किया गया। इससे पहले पिछले वर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इगास पर राजकीय अवकाश घोषित किया था। सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना जरूरी है।

उत्तराखंड के गढ़वाल में सदियों से दिवाली को बग्वाल के रूप में मनाया जाता रहा है। कुमाऊं क्षेत्र में इसे बूढ़ी दीपावली भी कहते हैं। इस पर्व के दिन सुबह पकवान बनाते हैं। रात में स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है उसके बाद भैला जलाकर उसे घुमाते हैं और ढोल नगाड़ों के साथ आग के चारों ओर नृत्य किया जाता है।

मान्यता है कि जब भगवान राम 14 साल के बाद लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने दिया जलाकर स्वागत किया। उसे दीपावली के त्योहार के रूप में मनाते हैं। गढ़वाल क्षेत्र में लोगों को इसकी जानकारी 11 दिन बाद हुई थी। इसलिए यहां पर दिवाली के 11 दिन बाद इगास मनाई जाती है।

प्रिचलित मान्यता के अनुसार गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी टिहरी के राजा महीपति शाह सेना के सेनापति थे। 400 साल पहले राजा ने माधो सिंह को सेना लेकर तिब्बत से युद्ध के लिए भेजा था। इसी बीच बग्वाल (दिवाली) का त्यौहार था। परंतु इस त्योहार तक कोई सैनिक वापस न आ सका। सबने सोचा माधो सिंह और उनके सैनिक शहीद हो गए। इसलिए किसी ने दिवाली (बग्वाल) नहीं मनाई। लेकिन दीपावली के ठीक 11वें दिन माधो सिंह भंडारी अपने सैनिकों के साथ तिब्बत से युद्ध जीत वापस लौट आए। इसी खुशी में 11 वें दिन दिवाली मनाई गई।

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