तीनो आरोपियों के खिलाफ वर्षों से गैर जमानती वारंट सीबीआई ने जारी कर रखा था
लखनऊ. सालों से फरार करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी के तीन जिम्मेदारों पर CBI ने शिकंजा कसा है। एक ही परिवार के तीनो आरोपियों को मुंबई और पुणे से गिरफ्तार करके लखनऊ स्थित CBI दफ्तर लाया गया है।
करोड़ों के फर्जीवाड़े में CBI का शिकंजा अब बैंक अफसरों पर भी कसने जा रहा है। आरोपियों से पूछताछ के बाद करोड़ों के बैंक घोटाले में कई राज और सामने आ सकते हैं।
सीबीआई की आरसी संख्या 0062007,0023 और 0062007,0028 में चारबाग़ निवासी गौरव गुप्ता, वैभव गुप्ता और उनकी मां उषा गुप्ता तकरीबन दस वर्षों से फरार थीं। पिता प्रेम सागर गुप्ता को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। भगोड़े आरोपी गौरव के ऊपर सीबीआई ने 20 हजार का इनाम भी घोषित कर रखा था।
गुप्ता परिवार ने सचिवालय स्थित यूनियन बैंक से 201.59 लाख और नक्खास की सेंट्रल बैंक ब्रांच से 49.40 लाख जैसे करीब नौ हाऊसिंग लोन स्वीकृत कराकर फंड्स का डायवर्जन अपनी कंपनियों में करके बड़े घोटाले की नींव रखी थी। तीन लोन सेंट्रल बैंक व 6 यूनियन बैंक से स्वीकृत हुए। घोटाले में बैंक अफसरों की भूमिका भी अहम् थी।
सीबीआई ने 20 हजार के इनामी आरोपी गौरव सागर गुप्ता को पुणे से गिरफ्तार किया है। जहाँ ये फर्जी पहचान दर्शाकर लम्बे समय से छुपकर एलएंडटी कम्पनी में नौकरी भी कर रहा था। वहीँ इसका भाई वैभव गुप्ता भी मुंबई में छिपकर नौकरी कर रहा था। ताकि किसी को शक न हो।
दोनों की आरोपी मां उषा गुप्ता भी कभी मुंबई और कभी पुणे में रहती थी। तीनो आरोपियों के खिलाफ वर्षों से गैर जमानती वारंट सीबीआई ने जारी कर रखा था।
बैंक घोटालेबाज़ों की जानकारी मिलने के बाद सीबीआई टीम ने जाल बिछाकर तीनों आरोपियों को धर दबोचा। आरोपियों को लखनऊ लाते ही सीबीआई ने मंगलवार को कैसरबाग़ स्थित विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण पश्चिम के न्यायालय में पेश किया।
जहाँ से तीनों आरोपियों के खिलाफ सीबीआई को 15 दिन की कस्टडी रिमांड मिली है। रिमांड अवधि खत्म होते ही तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया जाएगा। सीबीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दोनों बैंकों को करोड़ों की चपत लगाने वाले आरोपियों से सख्त पूछताछ के बाद साज़िश में शामिल बैंक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी जल्द होने की उम्मीद है।

