Dragon Fruit Farming in Meerut – ड्रैगन फ्रूट की फार्मिंग शुरू कर सचिन चौधरी ने मेरठ के किसानो को दिखाई नई राह

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Dragon Fruit Farming in Meerut  – ड्रैगन फ्रूट, नाम से ही मालूम पड़ता है कि कांटेदार फल होगा, बात भी काफी हद तक सही है क्योंकि इसका पौधा कटीले कैक्टस की तरह होता है जो बेल की तरह होता है, भारत में गुजरात के अंदर इसकी खेती बड़े पैमाने पर होने लगी है मगर अब इसकी खेती में दिलचस्पी गुजरात के बाहर भी उन किसानों में होने लगी है जो हॉर्टिकल्चर फार्मिंग में दिलचस्पी रखते हैं तभी तो उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र मेरठ के सचिन चौधरी जो हॉर्टिकल्चर में काफी दिलचस्पी रखते हैं ड्रैगन फ्रूट की फार्मिंग शुरू की है, इस क्षेत्र में इस कटीले, मगर बेहद खूबसूरत और हेल्थ के लिए लाभदायक फल की खेती की एक नई शुरुआत है। 

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image credit Munish Kumar

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सचिन चौधरी ने मवाना क्षेत्र में अपने पैतृक गाँव भैंसा में 1600 पौधों के साथ शुरुआत की है, इन पौधों की रोपाई हुए अब एक साल हो गया है और अब इसमें फूल आना शुरू हो गए हैं, बेहद सुगन्धित यह फूल रात में निकलते हैं और अपनी महक छोड़कर सुबह तक मुरझा जाते हैं. अब जल्द ही इन लताओं में ड्रैगन फ्रूट भी आना शुरू हो जायेंगे जो अक्टूबर के महीने तक फल देते रहेंगे। सचिन के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए एक एकड़ में लगभग पांच लाख रूपये की लागत आती है. सचिन ने बताया कि उन्हें इस खेती से लगभग आठ लाख रूपये सालाना की आमदनी होने की उम्मीद है। 

बता दें की देश में ड्रैगन फ्रूट के मांग काफी तेज़ी से बढ़ रही है क्योंकि यह फल सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है और मधुमेह, दिल के रोगियों के अलावा कैंसर के मरीज़ों को भी फायदा होता है. इसके सेवन से इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है, शारीरिक कोशिकाओं की मरम्मत भी करता है, गठिया के रोग में भी बहुत फायदेमंद है। अस्थमा के रोगी भी इस फल का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही कंजेनिटल ग्लूकोमा में भी काफी मददगार है. अपने इन्ही गुणों के कारण विदेशों में इस फल का सेवन आम है. भारत में भी यह फल काफी लोकप्रिय हो रहा है। 

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इस फल को आम तौर पर सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, आप इसे सीधे तौर भी खा सकते हैं, भारत के बाज़ारों में आम तौर पर इसके एक फल की कीमत 200 से 250 रूपये के बीच होती है. सचिन चौधरी के मुताबिक इसके एक फल की लागत 65 रूपये के आसपास आती है, वहीँ दिल्ली और गाज़ीपुर की मंडी में इसका भाव 100 रूपये से लेकर 150 रूपये तक मिल जाता है, इसका मतलब लागत का लगभग दो गुना। मेरठ के गन्ना क्षेत्र के लिए सचिन चौधरी की यह नई शुरुआत इलाके के उन किसानों के लिए एक नई राह खोल सकती है जो अब तक पारम्परिक रूप से गन्ने की खेती करते आ रहे हैं और फसल बेचने और बाद में पैसे के लिए महीनों, सालों इंतज़ार करते हैं। 

मेरठ के जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह ने सचिन चौधरी की इस पहल का स्वागत कियाहै, उन्होंने कहा कि हॉर्टिकल्चर फार्मिंग करने वालों को सरकार द्वारा अनुदान देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है, यकीनन सचिन चौधरी से प्रेरणा लेकर मेरठ के अन्य किसान भी इस नई खेती के बारे में ज़रूर सोचेंगे।

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