रामचरित मानस पर अपने बयान और विचार को लेकर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या लगातार डटे हुए हैं. अपने ऊपर हो रहे लगातार हमलों के बावजूद वो इस मुद्दे को और आगे बढ़ाना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने देश की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजकर इस पौराणिक ग्रन्थ की कुछ चौपाइयों में संशोधन किये जाने की मांग की है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्हें विशवास है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, आदिवासियों के सम्मान को सुरक्षित और सुनिश्चित बनाने का काम करेंगे।
विरोधियों पर हमला
पत्र में उन्होंने विरोधियों को तथाकथित बौद्धिक लोग बताकर कहा है कि यह लोग मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं. स्वामी प्रसाद ने प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाया कि पिछड़ी जाति में पैदा होने की वजह से उन्हें भी अपमान झेलना पड़ा, इसलिए इस मामले में आगे आएं ताकी अब आगे और लोग अपमानित न हों. पत्र में उन्होंने रामचरित मानस की कुछ लाइनों को प्रतिबंधित करने की मांग की है. सपा नेता ने पत्र में कहा कि देश में संविधान लागू है जिसके तहत सभी धर्म समान हैं.
बिहार से निकला था विवाद
बता दें कि रामचरित मानस विवाद की शुरुआत बिहार से हुई जहाँ नितीश सरकार के शिक्षा मंत्री ने रामचरित मानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ कहा था, उनके इस बयान की चौतरफा आलोचना हुई थी, बाद में पिछली भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री और अब सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस विवाद को और हवा दे दी. उनपर रामचरित मानस की प्रतियों को जलाने का मुकदमा भी दर्ज हो गया. मामले में भाजपा के अलावा हिंदू संगठन और संत समाज भी शामिल हो गया. इतने भारी विरोध के बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्य अपने कदम से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं.

