एसओ की 10 साल की कुल इनकम 53 लाख मिली
49.69 लाख की संपति का नहीं दे पाये हिसाब, मुकदमा दर्ज
प्रयागराज । पुलिस चाहे तो क्या नहीं कर सकती। वो इंसान को बंदर तो हाथी को गधा बना सकती है। मगर किसी एसओ की 10 साल की कुल इनकम 53 लाख हो लेकिन उसके पास 50 लाख की चल-अचल संपति हो तो सिर्फ 3 लाख रूपये में 10 साल तक, 30 हजार रूपये में एक साल और मात्र 2500 रूपये महीने में अपने पूरे परिवार को पालने का कारनामा भी पुलिस ही कर सकती है।
जी हां, हमारी तरह शायद आपको भी यकीन न हो लेकिन यह कारनामा कर दिखाया है प्रयागराज के घूरपुर थाने में एसओ रहे दारोगा अरविंद कुमार त्रिवेदी ने। वो बात अलग है कि हमारे और आपकी तरह एंटी करप्शन विभाग को भी एसओ की इस जादूगरी पर यकीन नहीं हुआ और विभाग ने आय से अधिक संपति के आधार पर एसओ के खिलाफ मुकदमा कायम करा दिया।
पुलिस विभाग में कमाई दो तरह से होती है यह हमने सुना था मगर दोगुनी होती है यह नहीं पता था। मगर एंटी करप्शन विभाग ने जब प्रयागराज के घूरपुर थाने में बतौर एसओ तैनात रहे दारोगा अरविंद कुमार त्रिवेदी की एक शिकायत के आधार पर जांच की तो यह सच भी सामने आ गया।
मामला यह है कि 2017 में अरविंद कुमार त्रिवेदी घूरपुर थाने के थानेदार थे। थाना दिलाने की बातचीत का एक ऑडियो सामने आने पर तत्कालीन आईजी रमित त्र शर्मा ने इस मामले की जांच प्रतापगढ के तत्कालीन एसपी शगुन गौतम को सौंपी थी।
एसपी की रिपोर्ट के आधार पर आईजी ने प्रकरण की जांच एंटी करप्शन विभाग से कराये जाने की सिफारिश की थी।एंटी करप्शन विभाग की जांच में पाया गया की 2006 से 2017 तक दारोगा अरविंद त्रिवेदी को 53 लाख की इनकम हुई थी।
लेकिन एसओ ने आय से 49 लाख 69 हजार 132 रुपया अधिक की कमाई की थी जिसका वह हिसाब नहीं दे पाये। जांच के आधार पर एंटी करप्शन विभाग ने घूरपुर थाने में ही पूर्व थानेदार अरविंद कुमार त्रिवेदी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
माना जा रहा है भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे और वर्तमान में बांदा जिले में तैनात दारोगा पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। वहीं इस जांच में कई अन्य पुलिसकर्मियों के भी नाम शामिल थे जिनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

