Fatima Khatoon: दुर्घटना ने बनाया दिव्यांग तो मेरठ की फातिमा ने हौसलों के दम पर खेलों में अंतराष्ट्रीय फलक पर भरी उड़ान

 
Fatima Khatoon

मेरठ। मेरठ की फातिमा खातून को सड़क दुर्घटना ने दिव्यांग बना दिया तो उसने हार नहीं नहीं मानी। फातिमा खातून ने अपने हौसलों के दम पर खेलों में अंतरराष्ट्रीय फलक पर ऐसी ऊंची उड़ान भरी कि जहां पर आज अपनी पहचान बना ली है। किठौर के राधना गांव की निवासी फातिमा खातून सड़क हादसे के बाद छह महीने तक कोमा में रहीं। जब उनको होश आया तो वो व्हीलचेयर पर थीं। इसके बाद उनका हौसला नहीं टूटा। नए सिरे से फातिमा खातून ने जिंदगी की शुरूआत की और खेल में नए मुकाम के लिए जुट गई। पैरा खेलों में राष्ट्रीय स्तर के पदक जीतने के बाद अब खातून ने चैथी रैंक के साथ एशियन गेम्स में जगह बना ली है। नॉर्थ अफ्रीका के मोरक्को में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स में मेरठ की बेटी फातिमा ने चक्का फेंक में कांस्य पदक झटका लिया। जबकि भाला फेंक में उनको चैथा स्थान मिला। छठी अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स मीट में फातिमा दो पदकों के साथ 2024 पेरिस पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई करने के साथ वल्र्ड चैंपियनशिप- 2023 व एशियन गेम्स में जगह पक्की कर चुकी है। वह एशिया में दूसरी रैंक की खिलाड़ी बन गई हैं।
पीवीवीएनएल में स्टेनोग्राफर पद पर तैनात फातिमा ने कभी सोचा नहीं था कि वह खेलों में अपना कॅरियर बनाएंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद नौकरी लगी तो बेगमपुल स्थित बिजली विभाग की टेस्ट डिवीजन में तैनाती मिली थी। जुलाई 2016 में अपने गांव राधना से स्कूटी से ऑफिस जा रही थीं इसी दौरान किठौर में एक कार चालक ने टक्कर मार दी। जिसमें फातिमा गंभीर घायल हुईं और दोनों हाथ और पैर टूट गए। फातिमा का चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया। शरीर में 194 टांके आए और कोमा में चलीं गईं। आठ बहन-भाइयों में बड़ी फातिमा के परिजनों ने उनके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। हादसे के बाद दोनों हाथों-पैरों में रॉड डालकर नौ जगह बोल्ट लगाए गए। इसके बाद से फातिमा व्हीलचेयर पर आ गईं। दुर्घटना के छह माह बाद जब फातिमा को होश आया और वो डेढ़ वर्ष तक बिस्तर पर ही रहीं।

सड़क हादसे से पहले फातिमा खातून का खेलों से कोई वास्ता नहीं था। हादसे के बाद वो ऑफिस से निकलते हुए व्हील चेयर से विक्टोरिया पार्क घूमने जाती थीं। चार जुलाई 2017 को उन्होंने पैरा खेलों में पहली बार हाथ आजमाया। यहां कोच गौरव त्यागी के निर्देशन में फातिमा ने अपनी जिंदगी की नई शुरूआत की। अब फातिमा आत्मविश्वास से भरी हुई हैं।  मार्च 2018 में लखनऊ में पैरा स्टेट प्रतियोगिता में फातिमा ने एक साथ तीन गोल्ड मेडल जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में पदक जीतकर तहलका मचा दिया। इसके बाद चंडीगढ़ में पैरा नेशनल में सिल्वर मेडल जीता। फातिमा ने 2018 में बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ग्रैंड प्रिक्स में कांस्य पदक जीता। फातिमा अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर 7 व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3 पदक जीत चुकी हैं। गत शुक्रवार को नॉर्थ अफ्रीका के मोरक्को में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स में फातिमा खातून ने चक्का फेंक में कांस्य पदक जीता।