RTO के बाबू को रिश्वत लेते एंटी करप्शन ने रंगे हाथों पकड़ा

 
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मेरठ। मेरठ आरटीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल आज उस समय खुल गई। जब आरटीओ आफिस का एक बाबू रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। आरोपी आरटीओ बाबू को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है। आरटीओ का रिश्वतखोर बाबू रजिस्ट्रेशन के नाम पर ई रिक्शा डिस्ट्रीब्यूटर पर रिश्वत लेने का दबाव बना रहा था। एंटी करप्शन टीम ने आरोपी बाबू के खिलाफ नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया है।  मेरठ के थाना लिसाड़ी गेट क्षेत्र के अहमदनगर निवासी अफजाल के पास बादशाह कंपनी ई रिक्शा की डिस्ट्रीब्यूटरशिप है। उन्होंने बताया कि आरटीओ आफिस का बाबू मुंशीलाल उन पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वत मांग रहा था। वह हर रोज रिश्वत का दबाव बनाता था। उन्होंने जब आरटीओ के बाबू को कहा कि उनके सभी कागजता पूरे हैं। कहीं कोई कमी नहीं है इसके बाद भी उनके यहां की ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा रहा तो बाबू ने उनकी बात नहीं सुनी और उनकी फाइल को रोककर रख लिया।

अफजाल ने बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत संभागीय परिवहन अधिकारी के अलावा अन्य अधिकारियों से भी की। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने एंटी करप्शन विभाग को इसके बारे में लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई। एंटी करप्शन की टीम ने करीब एक सप्ताह तक आरटीओ आफिस के इस बाबू पर नजर रखी। इसके बाद आज मंगलवार को कार्रवाई की शुरूआत की। एंटी करप्शन की टीम ने ई रिक्शा डिस्ट्रीव्यूटर अफजाल को 7500 रुपये के नोट पाउडर लगाकर दिए। इसके बाद उसको आरटीओ भेज दिया। इस दौरान एंटी करप्शन की टीम ने अपना जाल आरटीओ आफिस में फैला दिया। अफजाल रिश्वतखोर बाबू के पास पहुंचा और उसने वहीं रूपये रिश्वत खोर बाबू मुंशीलाल को दिए। इसी दौरान एंटी करप्शन की टीम ने उसको दबोच लिया। मौके पर ही बाबू के हाथ पानी से धुलवाए गए तो उसके हाथ गुलाबी हो गए। ये वहीं पाउडर था जो रूपये में लगाया गया था। उसे दबोच लिया। आरोपी बाबू को पकड़कर टीम नौचंदी थाने ले गईं। जहाँ मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया। बता दें कि मेरठ आरटीओ आफिस में रिश्वतखोरी का ये कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार आरटीओ आफिस के रिश्वतखोर बाबुओं को एंटीकरप्शन की टीम रंगे हाथों पकड़ चुकी है। इसके अलावा एक बार एक चैनल ने आरटीओ विभाग में रिश्वतखोरी के खेल को सीधा लाइव उजागर किया था। उसके बाद से आरटीओ आफिस में चारों ओर से ग्रिल लगवा दी गई थी। जिससे कि रिश्वतखोरी का खेल गुपचुप तरीके से भीतर चलता रहे और कुछ कोई नहीं बोले।